मुज़फ्फरनगर। देश मे किसानों को अपने हको की लड़ाई लड़ना सिखाने वाले और भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक रहे स्व: चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के करीबी रहे और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले किसान नेता गुलाम मोहम्मद जोला का सोमवार की सुबह सदमे के कारण हार्ट अटैक से निधन हो गया। गुलाम मोहम्मद जोला फिलहाल भारतीय किसान मजदूर मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे। रविवार को चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि में शामिल होने भी गए थे। सोमवार की सुबह किसान नेता गुलाम मोहम्मद जोला ने जैसे ही अखबार पढ़ा तो उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। समर्थक और परिजन आशंका जता रहे हैं कि भारतीय किसान यूनियन के दो फाड़ होने की खबर होने के कारण उन्हें सदमा लगा था। ईश्वर चौधरी राकेश टिकैत ने भी कहा कि वह किसान हितेषी थे हो सकता है कि उनकी इसी सदमे के कारण मौत हुई हो चौधरी साहब के काफी करीबी थे।
दरअसल देश में किसान राजनीति को नई दिशा देने और पीड़ित शोषित किसानों को इकट्ठा कर उन्हें अपने हकों की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित करने वाले भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की रविवार को 11 वीं पुण्य तिथि थी और उनकी पुण्यतिथि के ठीक अगले दिन उनके करीबी रहे और अनेक किसान आंदोलन में उनके कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले किसान नेता गुलाम मोहम्मद जोला का सदमे के चलते उस समय निधन हो गया।
Also read: पिता की पुण्यतिथि पर दो फाड़ हुई भाकियू,अलग थलग पड़े नरेश और राकेश
परिजन और भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता मानकर चल रहे हैं कि शायद गुलाम मोहम्मद जोला ने अखबार में भारतीय किसान यूनियन के दो फाड़ होने की खबर पढ़ी जिस वजह से सदमे के कारण उनका निधन हो गया क्योंकि गुलाम मोहम्मद जोला भारतीय किसान यूनियन से लंबे समय तक जुड़े रहे और दिल्ली रूप से आज भी भारतीय किसान यूनियन और टिकट परिवार से उनका गहरा जुड़ाव था। हालांकि उन्होंने परिस्थिति वश 2013 में बिगड़े सांप्रदायिक माहौल के कारण नया किसान संगठन बनाया था। जिसका नाम भारतीय किसान मजदूर मंच था। गुलाम मोहम्मद जोला भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं।
थाना बुढाना कोतवाली क्षेत्र के गांव जोला निवासी वयोवृद्ध किसान नेता गुलाम मोहम्मद जौला का 87 साल की आयु में निधन हो गया। उनके पुत्र मुन्ना प्रधान ने निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि सोमवार को सुबह करीब 7 बजे अखबार पढ़ते हुए दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ। उनका शव साय 6 बजे सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। देश की राजनीति में विशेष स्थान रखने वाले और हिमाचल के राज्यपाल रहे वीरेन्द्र वर्मा के साथ उन्होंने सियासत की शुरुआत की थी गुलाम मोहम्मद जोला एक संपन्न किसान परिवार मैं पैदा हुए थे इसीलिए वह किसानों की पैरोकारी के मामले में काफी सक्रिय रहते थे।
गुलाम मोहम्मद जोला लगभग 27 साल तक पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा के साथ राजनीति में सक्रिय रहने के बाद सन 1987 में भाकियू के गठन के दौरान स्व. चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत के साथ शामिल हो गए थे और भाकियू के संस्थापक सदस्य रहे गुलाम मोहम्मद जौला कई बार स्व. चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत के साथ जेल भी गए। टिकैत की पुण्यतिथि 15 मई से ठीक एक दिन बाद सोमवार सुबह ह्रदय गति रुक जाने से उनका निधन हो गया।
Also read: मेरठ-सहारनपुर मंडल में भाकियू का जोरदार प्रदर्शन, कृषि कानूनों का किया विरोध
भारतीय किसान मजदूर मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता राशिद अजीम व गुलाम मोहम्मद के पुत्र पूर्व प्रधान साजिद उर्फ मुन्ना ने बताया है कि सुबह के वक्त लगभग 7:30 बजे चौधरी साहब अखबार पढ़ रहे थे अखबार में उन्हें कुछ ऐसा दिखा कि जिस वजह से वह सदमे में हो कर उन्हें हर अटैक से उनकी मौत हो गई कल भी भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि में शामिल थे कल तक तो वह ठीक थे पर अचानक आज सुबह अखबार में कोई खबर पढ़ने से उनको दिल को आघात हो गया जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया है कि भारतीय किसान यूनियन में दो फाड़ की वजह से भी सदमे में इनको हार्ड अटैक आया हो उसी वजह से इनकी मृत्यु हुई हो
वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि गुलाम मोहम्मद जोला किसानों के सच्चे हितैषी थे और चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के खास सिपहसालार थे भारतीय किसान यूनियन के बाद से ही उन्होंने बड़े-बड़े मंच का संचालन किया और रविवार को हुई चौधरी साहब की पुण्यतिथि पर वह पूरा दिन सिसौली रहे और चौधरी साहब को श्रद्धांजलि दी यही नहीं वे चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की प्रतिमा के नीचे ही घंटों चिंतित अवस्था में बैठे देखे गए हो सकता है भारतीय किसान यूनियन की दो फाड़ होने की खबर अखबार में पड़ी हो जिस वजह से उनका निधन हुआ हो।

