लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्रथम चरण चुनाव 2022 – उत्तर प्रदेश में पहले चरण का चुनाव संपन्न हो चुका है। 11 जिलों की 58 विधानसभाओं में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 2017 की तुलना में इस बार हर सभी जिलों में 04 से 05 फीसदी मतदान ज्यादा हुआ है। सबसे ज्यादा मुजफ्फरनगर में 66.81 फीसदी मतदान हुआ है, जबकि 2017 में 62.09 फीसदी वोटिंग हुई थी। यही लगभग सभी जिलों का हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि इसका संकेत क्या हो सकता है। आमतौर पर विशेषज्ञों की राय मानी जाती है कि ज्यादा संख्या में बदलाव का अर्थ बदलाव का होता है। लेकिन, इस बार क्या यह संभव है। इन सभी बिंदुओं पर हमने पश्चिमी यूपी में चुनाव को बेहद नजदीक से देख रहे विशेषज्ञों से राय जानी। उनके अनुसार इस बार पश्विमी यूपी भारतीय जनता पार्टी के लिए काफी मुश्किल होने जा रहा है।
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क्या रहा पिछली बार परिणाम
2017 के चुनावी परिणामों पर नजर डालें तो पहले चरण की कुल 58 में से 53 पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। वहीं सपा और बसपा को दो-दो सीटें मिलीं थीं। इसके अलावा रालोद को भी एक सीट मिली थी। वहीं कांग्रेस का इस क्षेत्र में खाता नहीं खुला था। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण वोटों के ध्रुवीकरण को माना गया। क्योंकि, मुजफ्फरनगर में हुए दंगों की आंच से जाटों और मुस्लिमों के बीच हुई दूरी का लाभ बीजेपी को मिला था।
इस बार क्या है स्थिति
तीन कृषि कानूनों के लागू होने के बाद दिल्ली बॉर्डर पर करीब एक साल तक चले आंदोलन ने पश्चिमी यूपी में भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दीं। किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर यहीं देखने को मिला था। इस बीच रालोद के मुखिया चौधरी अजीत सिंह की कोविड से मौत भी हुई थी। जिसके बाद कमान जयंत सिंह संभाली। इस दौरान उन्होंने किसान आंदोलन को खुलकर समर्थन दिया। इस बीच किसान आंदोलन के दौरान करीब सात सौ ज्यादा किसानों की जानें गईं। जिससे किसानों की नाराजगी बढ़ी। इसका सबसे ज्यादा लाभ रालोद को मिलता हुआ दिखाई दिया। हालांकि चुनाव के ठीक पहले कृषि कानूनों को पीएम मोदी ने वापस लेने का ऐलान कर दिया और माफी भी मांगी। इसके बाद भी किसानों की सहानुभूति जयंत के प्रति दिखती रही। किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरा राकेश टिकैत भी लगातार बीजेपी पर हावी रहे। वहीं कई किसान संगठनों ने खुलकर बीजेपी का विरोध किया। इन सारे मुद्दों पर बीजेपी की स्थिति कमजोर दिखाई दे रही है।
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क्या मतदान के बाद की स्थिति
मतदान के बाद की स्थिति पर पश्चिमी यूपी की सियासत के जानकार वरिष्ठ पत्रकार अमित विश्नोई कहते हैं कि जादू इस बार नहीं चल पाया है। बीजेपी की लहर पर इस बार की किसानों की शहादत भारी है। वह कहते हैं कि सीटों को लेकर बहुत ज्यादा तो नहीं कहा जा सकता लेकिन यह लगभग तय है कि सपा-रालोद गठबंधन यहां बड़ी बढ़त लेने में कामयाब हो जाएगा। वहीं बसपा की भी सीटें बढ़ेंगी लेकिन, वह निर्णायक स्थिति वाली नहीं होगी। बीजेपी को बड़ा नुकसान होता दिख रहा है। जबकि नोएडा में एनबीटी में काम कर रहे रवि सिंह रैकवार सोशल मीडिया पर लिखते हैं कि नि:संदेह बीजेपी को नुकसान हुआ है। लेकिन, जितना नुकसान होता हुआ कुछ दिन पहले तक दिख रहा था, उतना नहीं है। लेकिन, सपा रालोद का गठबंधन यहां भारी लग रहा है। स्वतंत्र पत्रकार अजीत कुमार बताते हैं कि पश्चिमी यूपी इस बार बदलाव के मूड में है। बढ़ा हुआ मतदान इसका संकेत है।

