मेरठ। उत्तर प्रदेश चुनाव – चुनाव के पहले दौर का मतदान आगामी 10 फरवरी को होना है। इस दिन पश्चिमी उप्र के 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान होगा। लेकिन उससे पहले पश्चिमी उप्र की चुनावी लड़ाई बेहद दिलचस्प दौर में पहुंच गई है। यहां पर हर पक्ष हालात को अपने लिए भुनाने में लगा हुआ है। इस चीनी बेल्ट के किसानों को अपने पक्ष में करने के लिए सपा जहां तीन कृषि कानून और किसान आंदोलन से पैदा हुए हालातों को लेकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में जुटी है। वहीं दूसरी ओर भाजपा कैराना पलायन और 1017 के बाद प्रदेश में सुधरी कानून व्यवस्था को के साथ सपा और अन्य पूर्व सरकारों को कटघरे में खड़ा कर रही है। सपा और रालोद के गठबंधन के बाद उपजे राजनैतिक हालातों को पश्चिमी उप्र का मतदाता भी समझ रहा है। पहले चरण के इस चुनाव में सिर्फ भाजपा और गठबंधन ही नहीं बसपा, कांगेस, आजाद समाज पार्टी के अलावा ओवैसी की एआईएमआईएम भी मैदान में उतरी हुई है। कुल मिलाकर मुकाबला इस बार 2017 से भी अधिक रोचक होने की उम्मीद है।
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दलों के तैयारी की बात करें तो इस समय भाजपा सबसे अधिक आगे चल रही है। ओपिनियन पोल के हिसाब से भी भाजपा पहले नंबर है जबकि सपा और रालोद गठबंधन दूसरे नंबर पर दिखाया जा रहा है। तीसरे नंबर पर बसपा और चौथे नंबर पर कांग्रेस की स्थिति दिखाई दे रही है। कांग्रेस 2017 के चुनाव में भी पश्चिमी उप्र में कुछ खास नहीं कर पाई थी।
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पश्चिमी उप्र में 26 जिले शामिल किए जाते हैं। इन 26 जिलों में 136 विधानसभा सीटें आती हैं। जिसमें 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 109 सीटें जीती थी। जबकि सपा को 20 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। इस बार सपा रालोद गठबंधन मुस्लिम और जाटों के समीकरण को एक करने में लगा हुआ है। जिसके भरोसे गठबंधन अपनी स्थिति को मजबूत मानकर चल रहा है।

