मेरठ। उप्र में इस बार मुस्लिम बिरादरी ने एकजुट होकर वोट किया तो भाजपा का कमल कई सीटों पर मुरझा गया। खासकर पश्चिमी उप्र में तो मुस्लिम वोटरों ( Muslim Voters) ने कई सीटों पर भाजपा को काफी नुकसान पहुंचा। शामली की तीनों सीटें भाजपा बुरी तरह से हारी तो वहीं मेरठ में भी तीन सीटें भाजपा इसी बिरादरी के कारण गंवा बैठी। इस चुनाव ओवैसी फैक्टर भी काम नहीं आया और मुसलमानों ने एकजुट होकर अखिलेश की साइकिल की रफ्तार बढ़ाई। लेकिन इस रफ्तार का लाभ सपा को तो मिला लेकिन विधानसभा में इसकी संख्या चुनाव दर चुनाव कम होती जा रही है। इस 18वीं विधानसभा के चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का एक नया चेहरा देखने को मिला। इसने एकजुट होकर सपा मुखिया अखिलेश यादव का भरपूर साथ दिया। ये बात और है कि सपा सत्ता में वापसी नहीं कर सकी और भाजपा एक बार फिर से चुनाव जीत गई और बहुमत में आ गई। अब अखिलेश के सामने इस वोट बैंक को सहेजकर रखना सबसे बड़ी चुनौती है। इसी बिरादनी ने सपा को प्रदेश में मजबूत विपक्ष के रूप में खड़ा कर दिया।
2017 के चुनाव में 24 मुस्लिम विधायक (Muslim MLA) बने थे। जिनमें से 17 सपा से चुनाव जीते थे। मुस्लिम वोट बैंक ने इस चुनाव में अपनी भागीदार बढ़ाई इस बार 34 मुस्लिम विधायक जीतकर सदन पहुंचे हैं। इनमें सबसे अधिक सपा के 31 विधायक हैं। यह साफ हैं कि सपा के पाले में मुस्लिम समुदाय के 14 विधायकों की वृद्धि हुई है। कारण साफ है कि जो 31 विधायक सपा के खेमे के जीतकर आए हैं। उनमें इसी मुस्लिम वोट बैंक की अहम भूमिका है। जिसके वोट रूपी ईंधन से साइकिल की रफ्तार तेज हुई। अगर ये ही हाल रहा तो भाजपा तो 2024 का आम चुनाव काफी भारी पड़ सकता है। लिहाजा भाजपा को सपा के इस वोटबैंक की काट खोजनी होगी।
विधानसभा में मुस्लिम विधायकों की संख्या
वर्ष : संख्या
2017 – 24
2012 – 68
2007 – 56
2002 – 44
1996 – 39
1993 – 31
1991 – 23
1989 – 41
1985 – 50
1980 – 49
1977 – 48
1974 – 40
1969 – 34
1967 – 24
1962 – 29
1957 – 37
1951 – 44

