- पाबंदी वाले शहरों के लिए सिरदर्द बने पड़ोसी जिले
लखनऊ। वायु प्रदूषण को लेकर सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भले गंभीर हों,लेकिन प्रदूषण फैलाने वाले कारण अभी भी विघमान है। पड़ोसी जिलों में पटाखे जलने पर हवा पाबंदी वाले शहरों की खराब भी होगी। त्योहारों पर बाजारों में लगने वाले जाम , कूड़ा जलने की घटनाएं बदस्तूर है।
इसके अलावा सीमा से लगे जनपदों व राज्यों में पराली जलने का असर कई शहरों तक पहुंच रहा है। आसपास के जिलों में जल रहीं पराली का धुआं वायु प्रदूषण को और खतरनाक बना रहा है। यूपी सरकार ने एनजीटी न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए प्रदेश के १३ शहरों में पटाखों की बिक्री और उसे जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा चुकी है।
लेकिन इन शहरों के पड़ोसी जिले में पटाखों पर रोक न होने से वायु प्रदूषण का खतरा बरकरार है। मुजफ्फरनगर आगरा, वाराणसी, मेरठ,हापुड़, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बागपत, बुलंदशहर और मुरादाबाद में प्रदूषण स्तर गंभीर स्थिति में बताया है।
खराब एयर क्वालिटी का लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है खासतौर पर तब, जब कोरोना वायरस फेफड़ों पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है। खराब एयर क्वालिटी से उन लोगों को खतरा और बढ़ जाता है जो पहले से ही विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है। पटाखों पर प्रतिबंध के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए पुलिस सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रही है और लोगों से प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ तरीके से दिवाली मनाने का आग्रह किया जा रहा है।

