लखनऊ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर की शहर विधानसभा सीट से सभावती शुक्ला को चुनावी मैदान में उतारा है। यह सीट भाजपा की परंपरागत मानी जाती है और यहां से राधा मोहन दास अग्रवाल लगातार जीतते आये हैं। इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने बड़ा दांव खेलते हुए भाजपा के दिग्गज नेता रहे दिवंगत उपेंद्र शुक्ला की पत्नी सभावती शुक्ला को प्रत्याशी बनाया है। सीएम योगी के ऐलान के बाद गोरखपुर शहर हॉट सीट हो गई है। इस सीट से आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद भी चुनावी ताल ठोंक रहे हैं। इसके अलावा बसपा ने ख्वाजा शमसुद्दीन को चुनावी मैदान में उतारा है। जिसके बाद से इस सीट को लेकर खूब चर्चाएं हो रहीं हैं।
कितनी प्रभावी होंगी सभावती शुक्ला
सभावती शुक्ला के पति उपेंद्र शुक्ला बीजेपी के कद्दावर नेता रहे हैं। भाजपा ने 2018 के लोकसभा के उपचुनाव में उन्हें उतारा था। हालांकि, सपा से वो चुनाव हार गए थे। उसके बाद 2019 के आम लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काटकर अभिनेता रवि किशन को चुनावी मैदान में उतार दिया था। हालांकि कुछ दिन के बाद उपेंद्र शुक्ला की मौत हो गई थी। उसके बाद उनके दोनों बेटों और पत्नी सभावती ने भाजपा पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सपा का दामन थाम लिया था। जिसके बाद ही अखिलेश यादव ने उन्हें टिकट देने का ऐलान किया था। अखिलेश ने टिकट वितरण में अपने वादे को पूरा कर दिया है।
ये है जातिगत ताना-बाना
गोरखपुर शहर सीट का जातिय समीकरण देखें तो यहां कुल मतदाता लगभग साढ़े चार लाख हैं। जिसमें सबसे ज्यादा ब्राह्मण और कायस्थ मतदाता 60-60 हजार हैं। वहीं निषाद और मुसलमान भी 40-40 हजार हैं। इसके अलावा यादव 15 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, वैश्य और एससी 50-50 हजार हैं।
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कांटे की है टक्कर
इस सीट पर लड़ाई कांटे की मानी जा रही है। हालांकि बीजेपी यहां से लगातार जीतती आ रही है लेकिन इसके पीछे 50 हजार वैश्य मतदाता निर्णायक हुआ करते थे क्योंकि राधा मोहन दास अग्रवाल की पकड़ मजबूत मानी जाती थी। वहीं क्षत्रिय, कायस्थ और ब्राह्मण मतदाता भी भाजपा के वोटर माने जाते हैं। लेकिन, सीएम योगी आदित्यनाथ की छवि आमतौर ब्राह्मण विरोधी बनाने की कोशिश की जाती रही है। मठ का इतिहास भी इस वोटबैंक को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सपा के ब्राह्मण चेहरे से योगी आदित्यनाथ की चुनौती बढ़ने वाली है। साथ ही उनके साथ सहानुभूति भी है। इसके अलावा मुसलमान मतदाता भी सपा के साथ माने जाते हैं, हालांकि बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर मामले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है। लेकिन, चुनाव के परिणाम ही असली नतीजे होंगे।

