मेरठ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – गन्ना और जाट इन दोनों से पश्चिमी उप्र की पहचान होती है। पश्चिमी उप्र की 156 सीटों पर जाट मतदाता काफी निर्णायक भूमिका निभाता है। यहीं कारण है कि सभी राजनैतिक दल जाटों को हथेली पर रखते हैं। यहां के जाट को जरा सी छीक आ जाने पर दलों के माथे पर पसीना आने लगता है। भाजपा के लिए इस बार 2017 वाला माहौल पश्चिमी उप्र में नहीं बन पा रहा है। 2017 में वोटों के ध्रुवीकरण के चलते भाजपा जाटों की वोटों को अपने पक्ष में करने में कामयाब हुई थी। जिसके कारण भाजपा ने पूरे पश्चिमी उप्र में दूसरी पार्टियों का सूपड़ा साफ कर दिया था। यहां तक कि जाट की पार्टी कही जाने वाली राष्ट्रीय लोकदल को भी बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस बार जाट भाजपा से नाराज चल रहा है। पिछले कुछ दिनों भाजपा जनप्रतिनिधियों के साथ गांवों में हुई घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं। वहीं पिछले दिनों सिवाल खास के गांव छुर में भाजपा प्रत्याशी के काफिले पर पथराव किया गया और कारों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। बता दे कि छुर जाट बाहुल्य गांव है।
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जाटों की इस नाराजगी से भाजपा शीर्ष नेतृत्व के माथे पर बल पड़ गए है। अब पश्चिमी उप्र के नाराज जाटों को मनाने की कमान गृहमंत्री अमित शाह ने संभाली है। जाट बिरादरी को मनाने के साथ ही गृहमंत्री अमित शाह जाटों के नेताओं के साथ बैठक कर उनकी नाराजगी को दूर करने का काम करेंगे।
जाट बिरादरी के प्रभावशाली नेताओं से मिलकर गृहमंत्री अमितशाह ने पश्चिम के जाटों की नाराजगी दूर करने का काम किया। लेकिन वे अपने इस मकसद में कितना सफल हुए यह चुनाव के बाद ही पता चलेगा जब मतदान का परिणाम सामने आएगा।
जाट आरक्षण और कृषि कानून की नाराजगी :
बता दें जाट आरक्षण को लेकर जाट बिरादरी काफी समय से संघर्ष कर रही है। जाट आरक्षण केद्र सरकार के लिए किसी सरदर्द से कम नहीं है। वहीं इसी जाट आरक्षण के बीच कृषि कानून को लेकर चले किसान आंदोलन भी बीच में आ गया। जिसको लेकर जाट किसानों में काफी रोष है। हालांकि सरकार के कृषि बिल वापस लेने के बाद किसान आंदोलन समाप्त हो गया लेकिन फिर भी कहीं न कहीं जाट किसानों में सरकार के प्रति नाराजगी बनी हुई है। हरियाणा में जाट आरक्षण के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज हुए मुकदमें भी पश्चिमी उप्र के जाटों के जाटो की नराजगी का कारण बन रहे हैं। बता दें कि हरियाणा की किसी भी राजनीति का असर पश्चिमी उप्र के जाट बेल्ट पर जरूर पड़ता है।
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18 जिलों में 17 फीसदी जाट मतदाता प्रभावित करता है चुनाव :
पश्चिमी उप्र के 26 जिलों में 18 जिले जाट बाहुल्य माने जाते हैं। इनमें मेरठ, सहारनपुर, आगरा, मुरादाबाद,आगरा और अलीगढ़ मंडलों के जिलों में 17 फीसदी जाट मतदाता किसी भी चुनाव में राजनैतिक दलों का इतिहास—भूगोल बिगाड़ने की पूरी हैसियत रखत है। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद जाटों ने भाजपा को वोट दिया था। जिसका नतीजा 2014 में भाजपा ने विपक्ष को पूरा सूपड़ा ही साफ कर दिया था। उस दौरान भी अमित शाह ने जाटों को भाजपा के पक्ष में वोट करने के लिए मना लिया था। लेकिन अब इस बार जाट भाजपा से नाराज है। नाराज जाट बिरादरी को मनाने का जिम्मा इस बार भी शाह के हाथ में है। देखना है शाह अपने जाट मनाओं एजेंडे में कहा तक कामयाब होते हैं।

