लखनऊ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – समाजवादी पार्टी को प्रदेश के 80 ब्राह्मण संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। गोरखपुर के कद्दावर ब्राह्मण नेता विनय शंकर तिवारी के नेतृत्व में इन 80 संगठनों ने समाजवादी पार्टी में अपनी आस्था जताई। मंगलवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय पर इन संगठनों ने सपा को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। दावा किया जा रहा है कि विनय शंकर तिवारी के नेतृत्व में बलिया से लेकर गोरखपुर तक के छोटे-बड़े 80 से ज्यादा संगठन समाजवादी पार्टी के साथ आए हैं। गौरतलब है कि यूपी में ब्राह्मण समाज को जोड़ने की सियासत पिछले दिनों काफी तेज हुई थी इसी क्रम में यह जॉइनिंग काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आपको बता दें यूपी के करीब 115 सीटों पर ब्राह्मण समाज निर्णायक स्थिति में रहता है। इसके अलावा करीब 12 ऐसे जिले हैं जहां पर ब्राह्मणों की संख्या 25 फिर भी से ज्यादा है।
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इन जिलों में बहुतायत हैं ब्राह्मण
पूर्वांचल के 12 जिलों में ब्राह्मण वोट बैंक क़रीब 15 फ़ीसदी के पास पास माना जाता है। इसमें गोरखपुर, महाराजगंज, संतकबीरनगर, इलाहाबाद, कानपुर, चंदौली, वाराणसी, अमेठी, जौनपुर, देवरिया, बस्ती और बलरामपुर में अच्छी खासी संख्या है। यही कारण है कि ब्राह्मणों पर हर दल की नजर है।
बसपा ने शुरू की थी लामबंदी
हालांकि ब्राह्मणों को अपनी पार्टी में जोड़ने की कवायद हर दल कर रहा है लेकिन सबसे पहले इसकी शुरुआत बहुजन समाज पार्टी ने की थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में मायावती 2007 के फार्मूले पर काम कर रही है जिसके तहत वह दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम गठजोड़ कर एक बार फिर सत्ता में आने का ख्वाब देख रहीं हैं। इसी के तहत उन्होंने ब्राह्मण समाज को जोड़ने के लिए प्रबुद्ध सम्मेलन किया था और साथ ही अपने महासचिव और राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्र को पूरे प्रदेश के दौरे पर भेजा था। मायावती के इस कदम के बाद हर राजनीतिक दल ब्राह्मणों को जोड़ने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम करने शुरू कर दिए थे। इस बीच समाजवादी पार्टी ने वादा किया कि वह भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित करेगी। यह वादा पूरा भी किया गया और अखिलेश यादव खुद लोकार्पण करने पहुंचे।
तीन दशक ने नहीं बना कोई ब्राह्मण सीएम
यूपी में ब्राह्मणों की उपयोगिता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता लेकिन पिछले तीन दशक की सियासत पर नजर डालें तो यहां पर कोई भी ब्राह्मण समाज का मुख्यमंत्री नहीं बना है। कांग्रेस के एन डी तिवारी आखरी बार ब्राह्मण चेहरे के रूप में सीएम रहे। जबकि उनके पहले गोविंद बल्लभ पंत दो बार, सुचेता कृपलानी, कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा, एनडी तिवारी और श्रीपति मिश्रा भी सीएम रह चुके हैं।
बसपा आकर सपा में ब्राह्मणों को जोड़ रहे विनय
विनय शंकर तिवारी किसी परिचय के मोहताज नहीं है। इनके परिवार का दखल यूपी की सियासत में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पिता हरिशंकर तिवारी पूर्वांचल के जाने-माने ब्राह्मण चेहरा रहे हैं। इनका पूरा परिवार अभी तक बहुजन समाज पार्टी में रहा है और हाल ही में समाजवादी पार्टी में शामिल हुआ है। सपा में शामिल होने के बाद ब्राह्मण चेहरे के रूप में विनय शंकर तिवारी ने कमान संभाली है और पूर्वांचल में ब्राह्मणों को समाजवादी पार्टी के प्रति लामबंद करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
योगी से है सीधी टक्कर
गोरखपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ और हरिशंकर तिवारी के बीच दुश्मनी काफी लंबे समय से चली आ रही है। हरिशंकर तिवारी के घर को हाता के नाम से जाना जाता है और अभी तक यह दावा किया जाता रहा है कि किसी भी सरकार में पुलिस उनके हाथ में प्रवेश नहीं कर पाई है। लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ के आने के बाद पुलिस कई बार आते में गई जिसे हरिशंकर तिवारी का परिवार अपनी साख पर बट्टा मानता आया है। अब इस परिवार के समाजवादी पार्टी के साथ आने के बाद गोरखपुर की लड़ाई काफी दिलचस्प हो गई है।

