मेरठ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – प्रदेश में चुनाव कोई भी रहा हो। हमेशा से ग्लैमर का तड़का लगता रहा है। चुनाव मैदान से लेकर प्रचार तक में फिल्मी सितारें अपनी मौजूदगी का अहसास कराते दिखाई देते थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। पिछले तीन दशकों में यह पहली बार है जबकि ग्लैमर और फिल्मी स्टार इस चुनाव से दूरी बनाए हुूए हैं। 2022 का विधानसभा चुनाव बिना ग्लैमर और फिल्मी स्टार के कुछ फीका सा प्रतीत होता जान पड़ रहा है। बात यूपी की ही नहीं देश भर में सियासी दल फिल्म स्टार को अपने पक्ष में प्रयोग करते रहे हैं। दक्षिण भारत के फिल्म स्टार एनटी रामाराव को कौन भूल सकता है जो कि एक फिल्म स्टार होने के साथ दक्षिण के बड़े राजनीतिज्ञ भी साबित हुए थे। कुछ ऐसी ही कहानी जयललिता की थी। जो कि दक्षिण भारत की एक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री थी उसके बाद राजनीति में भी उन्होंने खूब रंग जमाया और मुख्यमंत्री तक बनीं। फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन भी इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र चुनाव लड़े और वे वहां से भारी मतों से जीतकर संसद पहुंचे लेकिन उनको राजनीति रास नहीं आई वे वापस बालीवुड लौट गए।
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इसी कड़ी में सुनील दत्त भी रहे। जो फिल्म स्टार के बार कांग्रेस के सांसद भी बने। फिल्म स्टारों ने राजनीति की दुनिया में उसी तरह से मुकाम हासिल किया जिस तरह से उन्होंने ग्लैमर की दुनिया में हासिल किया था। प्रदेश की सियासत में फिल्म स्टारों को राजनीति में उतारने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वे हैं दिवंगत नेता अमर सिंह। जो कि समाजवादी पार्टी से ताल्लुक रखते थे। यह बात अलग है कि बाद में उनके संबंध काफी बिगड़ गए थे। उन्होंने जयाप्रदा को सांसद बनवाया तो अमिताभ बच्चन और संजय दत्त से सपा के पक्ष में प्रचार करवाया था। यूपी की सियासत में राजबब्बर 1994 में राज्यसभा उसके बाद 2004 में फिरोजाबाद से सपा के सांसद रहे। भोजपुरी फिल्म स्टार रवि किशन भी गोरखपुर से भाजपा के सांसद हैं। हेमामालिनी मथुरा से भाजपा सांसद हैं। सपा और भाजपा ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में जया बच्चन और हेमामालिनी का नाम तो शामिल किया है लेकिन वे कहीं दिखाई नहीं दे रही हैं। इसी तरह से इस बार कोई स्टार चुनाव मैदान में भी किसी पार्टी की ओर से उम्मीदवार नहीं है।

