यूपी चुनावी दंगल 2022 : यूं ही नहीं कहा जाता भाजपा को चाय वाली पार्टी

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यूपी चुनावी दंगल 2022 : यूं ही नहीं कहा जाता भाजपा को चाय वाली पार्टी

मोदीजी के मंत्रियों को चाय से है बेहद लगाव

मेरठ | यूपी चुनावी दंगल 2022 – देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी समय में रेलवे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। कई बार उन्होंने खुद सार्वजनिक मंच पर यह बात साझा की है। यही नहीं मोदी जी के मंत्रियों को भी चाय से बेहद लगाव है। इसके कई उदाहरण आगामी विधानसभा चुनाव के तहत चल रहे प्रचार के दौरान देखने को भी मिल रहे हैं। हाल फिलहाल में पश्चिमी यूपी में डेरा डाल रहे मोदी जी के मंत्रियों की चाय की चुस्कियां भी चर्चा का विषय बन रही हैं। मंत्री जनसंपर्क के नाम पर कभी किसी के घर चाय पीने पहुंच जाते हैं, तो कभी गली नुक्कड़ के बाहर चाय की टपरी पर घूंट भरते दिखाई देते हैं। जिसके बाद स्पष्ट है कि भाजपा को चाय वाली पार्टी यूं ही नहीं कहा जाता है।

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टपरी पर चाय पीने निकले उप मुख्यमंत्री
हाल फिलहाल में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में चुनावी प्रचार के दौरान सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य अपने प्रत्याशी के लिए वोट मांगने निकले थे। यहां शहर विधानसभा के लोगों से वोट की अपील करने के लिए उन्होंने घर-घर संपर्क किया। इस दौरान क्षेत्र में ब्रह्मपुरी इलाके पहुंचे उपमुख्यमंत्री ने चाय की टपरी देखते ही अपनी गाड़ी रुकवा ली। अपनी पदयात्रा की शुरुआत भी उन्होंने टपरी के बाहर पड़ी बेंच पर चाय की चुस्कियां लेने के बाद ही की। यही नहीं उप मुख्यमंत्री द्वारा चाय वाले को भुगतान स्वरूप बड़ा गुलाबी नोट देने की चर्चा भी काफी गरमाई रही।

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प्रदेश अध्यक्ष ने घर पर पी चाय
चुनावी महासमर के दौरान नेता और मंत्री लोगों के घर जाकर चाय पीने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं। बीते कुछ दिन पहले मेरठ पहुंचे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी जनसंपर्क करते हुए क्षेत्र के मतदाता के घर चाय पी थी। इससे पहले भी स्मृति ईरानी द्वारा भी लोगों के घर चाय पीने की चर्चा सुनाई दी थी।

कार्यकर्ताओ में लगी होड़
आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर उत्तरप्रदेश की हवा बदली हुई है। किसान आंदोलन के चलते पश्चिम यूपी में नाराज किसानों को मनाने के लिए मंत्री और नेता इन दिनों मेरठ व सहारनपुर मंडल को केंद्र बनाए हुए हैं। जिसके चलते कार्यकर्ताओं में भी अपने मंत्री और नेताओं को चाय पिलाने की होड़ लगी हुई है। कार्यकर्ता नेताओं को अपने घर बुलाकर चाय पिलाने का एक मौका भी हाथ से जाने नहीं देना चाहते हैं। यहां तक की भाजपा द्वारा किए जा रहे संवाद कार्यक्रमों में भी कार्यकर्ता चुनाव से अधिक चाय पर चर्चा करते दिखाई दे रहे हैं।

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