मेरठ। भले ही माना जा रहा हो कि चुनाव में किसानों और जाटों ने भाजपा को पहले में वोट नहीं किया। मेरठ और मुजफ्फरनगर को छोड़ दे तो पश्चिमी यूपी के अन्य सभी जिलों में जाटों और किसानों ने ईवीएम पर जमकर भाजपा का बटन दबाया। यानी कृषि कानून और नाराजगी के बाद भी किसानों और जाटों ने भाजपा (BJP) को वोट किया। मेरठ मंडल के जिलों में मेरठ को छोड़ दे तो बागपत, गाजियाबाद, हापुड, नोएडा, बुलंदशहर,आगरा मंडल, अलीगढ़ मंडल के हाथरस, मथुरा, सहारनपुर, पीलीभीत में भाजपा का प्रदर्शन शानदार रहा है। इन जिलों में जहां भाजपा का शानदार प्रदर्शन रहा। पश्चिमी उप्र किसान आंदोलन के दौरान भाजपा के लिए विरोध का क्षेत्र बन गया था। इस जिलों में कई स्थान पर भाजपा के विधायकों के साथ हाथापाई हुई तो कहीं स्थानों पर भाजपा पदाधिकारियों पर भी पथराव हुआ। लेकिन इसके बाद भी पश्चिमी उप्र के इन जिलों में अपना जलवा बरकरार रहने में कामयाब रही। कारण साफ है कि किसानों और जाटों के आम मतदाताओं पर कृषि कानून और जाट आरक्षण जैसे मुददों का कोई असर नहीं पड़ा।
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इन जिलों में सपा और रालोद (SP and RLD) ने भी चुनाव में पूरा जोर अजमाया। लेकिन रालोद मेरठ और मुजफ्फरनगर की सीमा से बाहर नहीं निकल सका। लंबे चले कृषि कानून विरोधी आंदोलन ने भी यहां के किसानों को सोचने का मौका दिया। भाजपा को इस क्षेत्र में भले ही अच्छी कामयाबी और सीटें मिली हो। लेकिन इन जीत को बरकरार रखना भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। पश्चिमी उप्र में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए भाजपा को नए सिरे से रणनीति पर विचार करना होगा। वहीं दूसरी ओर पश्चिमी उप्र में फिर से पैठ जमा रही रालोद की कोई मजबूत काट खोजनी होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, आगरा, अलीगढ़ और बरेली मंडलों के 26 जिलों की 136 विधानसभा सीटों पर सन 2017 के चुनाव में भाजपा ने 109 सीटों पर विजय हासिल की थी जबकि सपा के खाते में 21 सीटें गई थीं।
रालोद के गढ़ में भाजपा का जलवा बरकरार रहा। जाट बहुल बागपत जिले को रालोद का गढ कहा जाता है। यहां की तीन विधानसभा सीटों में दो पर भाजपा ने जीत हासिल की।

