By: Dheeraj Upadhyay
लखनऊ: UP Assembly Elections 2022 – आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए चल रहे घमासान के बीच राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की कार पर चली गोली से चुनावों में कोई फर्क पड़ेगा? क्या बुलेट कांड के बाद ओवैसी की राजनीति प्रदेश में चमकेगी और वह मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण कराने में सफल होंगे। वैसे भी विपक्षी पार्टियाँ उनपर भाजपा की बी- टीम होने का आरोप लगाती है।
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विपक्ष को यह कहने का मौका तब और मिल जाता है जब उनके काफिले पर गोली चलने के तुरंत बाद केंद्र उन्हे जेड श्रेणी की सुरक्षा देती है। हालांकि ओवैसी ने इस सुरक्षा को यह कहते हुए लेने से मना कर दिया कि “उन्हे (मुसलमान) को भी बराबरी और सम्मान चाहिए अपने लिए सुरक्षा नहीं”।
गौरतलब है कि ओवैसी की पार्टी ने यूपी चुनाव में 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है और यह सीटें अधिकतर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों की हैं। ख़ासतौर पर वेस्ट यूपी में, जहां पहले चरण में वोट पड़ने हैं और मुसलमान जहां निर्णायक भूमिका में हैं। वैसे भी इस बार जयंत और अखिलेश पश्चिम में भाजपा को कड़ी टक्कर देते दिख रहे है वहीं किसान आंदोलन से उपजा विरोध भी भाजपा के विरुद्ध जाता दिख रहा है। पश्चिम के पहले चरण में ओवैसी के 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। इन सीटों पर अगर AIMIM को समर्थन मिला तो ध्रुवीकरण और मुस्लिम वोटों के बंटवारे से सपा-आरएलडी गठबंधन को नुकसान और भाजपा का फायदा हो सकता है।
बतादे कि बिहार विधानसभा चुनाव में पांच सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद AIMIM ने यूपी में विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की अगुवाई वाले भागीदारी मोर्चा में शामिल भी हुए लेकिन बाद में ये सारे दल समाजवादी पार्टी के साथ चले गए। जबकि सपा ने AIMIM को गठबंधन में शामिल नहीं किया।
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हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस बात का जवाब तलाशा जा रहा है, कि क्या ओवैसी Owaisi पर हमले के बाद आगामी चुनाव पर कोई असर पड़ेगा या नहीं? वहीं विपक्ष और उनके खिलाफ राय रखने वाले ओवैसी की कार पर हुए हमले को साजिश के रूप में भी देखने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। वैसे भी सूबे का मतदाता बहुत समझदार और निर्णायक सरकार बनाने में विश्वास रखता है।

