सिंगौरगढ़ का किला, जितना पुराना इस किले का इतिहास है, उतनी ही ये जगह आज भी एक रहस्य भरी बनी हुई है। तो चलिए आपको इस सिंगौरगढ़ किले के बारे में खास बातें बताते हैं।
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में सिंगौरगढ़ का ये किला स्थित है और ये गढ़ साम्राज्य का पहाड़ी किला है। इस किले को रानी दुर्गावती का विवाह स्थल भी कहा जाता है। साल 1564 में जब रानी दुर्गावती का शासन काल था, तब मुगलों से युद्ध में इस किले की काफी अहम भूमिका रही। किले को इतनी मजबूती से बनाया गया है कि यहां कि सुरक्षा को भेद पाना मुगल शासकों के बस की बात नहीं थी।
इसके पीछे दो वजह ये थी कि पहली इस किले के सामने पहाड़ सुरक्षा की दीवार बनकर खड़ा था, और दूसरा तहखानों से निकली खुरंग का अंतिम छोर रानी और उनकी सैनिक टुकड़ियों के अलावा किसी को नहीं पता था।
सिंगौरगढ़ जलाशय की प्राकृतिक सौंदर्यता भी देखते ही बनती है। इस सैकड़ों साल पुराने जलाशय में कभी पानी खत्म नहीं हुआ। इसको लेकर मान्यताएं हैं कि ये तालाब अपने अंदर कई अनेकों रहस्य समेटे हुए है।
बताया जाता है कि इस तालाब के अंदर एक बावली बनी है, जहां पर स्वर्ण मुद्राओं का खजाना छिपे होने की बातें कही जाती हैं। यहां पानी कभी खत्म न होने की वजह से इस जलाशय के अंदर जाने के लाखों प्रयास असफल रहे और अब ये बावली भू गर्व में चली गई है।
यहां के स्थानीय बुजुर्ग लोग मानते हैं कि सिंगौरगढ़ जलाशय में रानी दुर्गावती के शासनकाल की स्वर्ण मुद्राएं समेत रानी का पारस पत्थर भी इस जलाशय के अंदर डाल दिया गया था।

