देश में जल्द ही लोकसभा चुनाव होने वाले हैं ऐसे में भाजपा ने अपनी पार्टी द्वारा शासित राज्यों के माध्यम से विवादित यूसीसी मुद्दे को आगे बढ़ाकर ध्रूवीकरण का काम शुरू कर दिया है. इसकी शुरुआत भाजपा शासित राज्य उत्तराखंड से हुई है जहाँ आज विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने बिल को पेश कर दिया। इस तरह गोवा के बाद उत्तराखंड भी अब दूसरा ऐसा राज्य बनने की ओर बढ़ चला है जहाँ समान नागरिक संहिता कानून लागू है.
पुष्कर सिंह धामी ने जैसे ही मंगलवार को विधानसभा में यूसीसी बिल पेश किया विपक्षी विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया जिसे देखते हुए सदन की कार्रवाई को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. कांग्रेस का कहना है कि उत्तराखंड का इस्तेमाल एक प्रयोग के लिए मोदी सरकार कर रही है. वो देखना चाहती है कि लोगों का रिएक्शन क्या होने वाला है. मुस्लिम संगठन भी इस बिल का मुखरता से विरोध कर रहे हैं. वहीँ भाजपा इसे एक ऐतिहासिक बिल बता रही है. भाजपा विधायक शिव अरोड़ा ने कहा कि यह उनके लिए एक ऐतिहासिक क्षण है. समान नागरिक संहिता यानि UCC से बड़ी खुशी क्या हो सकती है? यह बिल लोगों को समान अधिकार देगा. बता दें कि इस विवादित बिल के पेश होने की वजह से विधानसभा के क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गयी है ताकि किसी तरह का कोई विरोध प्रदर्शन न हो सके.
इस विवादित बिल पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी की उत्सुकता उन्हें समझ में आती है. उन्होंने सरकार बनाने के लिए यूसीसी का सहारा लिया था. हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड के बाद दूसरे राज्य भी यूसीसी लाने का प्रयास करेंगे हालाँकि इसे केंद्र को लाना चाहिए था लेकिन मोदी सरकार अभी राज्यों के माध्यम से एक प्रयोग के तौर पर ये सब कर रही है. रावत के मुताबिक ये सारा खेल लोकसभा चुनाव को लेकर हो रहा है. इस विवादित बिल के बहाने भाजपा राज्यों में धार्मिक विद्वेष फैलाना चाहती है ताकि वोटों का ध्रूवीकरण हो।

