अंतिम चरण में क्यों चला इमोशनल कार्ड ?
उबैद उल्लाह नासिर

बिहार विधान सभा चुनाव के अंतिम चरण में सीमांचल क्षेत्र में अपनी चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुख्य मंत्री नितीश कुमार ने अचानक यह एलान करके सबको चौंका दिया कि यह उनका अंतिम चुनाव है उन्होंने यह भी कहा कि अंत भला तो सब भला अर्थात जनता उनके इस अंतिम चुनाव में उनको अपना समर्थन दे उन्हें I नितिश के इस एलान की सियासी पंडित अपनी अपनी सोच के हिसाब से व्याख्या कर रहे हैं I लेकिन अधिकतर लोग इसे नितीश का इमोशनल कार्ड बता रहे उनका मत है कि चुनाव अभियान के दो चरणों बाद नितीश को अंदाजा हो गया है कि उनके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक चुकी है इसलिए वह यह इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं ताकि सीमान्चल की मुस्लिम बाहुल्य जिन 23 सीटों पर उन्होंने पिछले चुनाव में जीत दर्ज की थी वह बचाई जा सकें I इस क्षेत्र में असदुद्दीन ओवैसी की मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन ने अच्छी पैठ बना रखी है उसका उपेंद्र कुशवाहा और बहुजन समाज पार्टी से गठजोड़ भी है नितीश की कोशिश यह है कि इस क्षेत्र का सत्ता मुखालिफ वोट यदि उन्हें नहीं मिलता तो वह ओवैसी वाले गठजोड़ को मिल जाये I ध्यान रहे कि नितीश कुमार अपना पहला चुनाव 1977 में लड़ा था वह 2005 से कोई चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन मुख्य मंत्री की कुर्सी पर विराजमान हैं हर बार वह विधान परिषद् के सदस्य ही बनते रहे हैं i ज़ाहिर है उनके इस एलान का मतलब सक्रिय राजनीति से किनाराकशी है लेकिन ऐसा क्यों? कुछ लोगों का कहना है कि नितीश 69 वर्ष के हो गए हैं और अब राजनीति से संन्यास लेना चाहते है हालांकि राजनीति में रिटायरमेंट की कोई आयु नहीं होती और न ही नितीश के स्वास्थ्य में ऐसी कोई कमी दिखाई देती है जो उनको रिटायरमेंट पर मजबूर करती हो I असल में नितीश के सामने समय सबसे बड़ी समस्या अपने 15 वर्षों के कार्यकाल का हिसाब देना है इन 15 वर्षों में उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर ही सत्ता चलाई जिससे उनका भावनात्मक रिश्ता रहा है ख़ासकर उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी से उनकी बहुत गाढ़ी छनती रही है लेकिन इस बार NDA सरकार की सभी खामियों कमियों ख़ास कर lockdown के समय प्रवासी मजदूरों की समस्या, बेरोजगारी, जर्जर आर्थिक स्थित, कोरोना के इलाज में ढील और लापरवाही इन सबका ठीकरा उनके सर पर ही फूट रहा है और बीजेपी ने बड़ी चालाकी से इन सभी मामलों में केंद्र सरकार की गलतियों का ठीकरा भी नितीश पर ही फोड़ दिया है Iनितीश अपने सियासी जीवन का सबसे कठिन चुनाव लड़ रहे हैं अब तक उनके साथ सुशासन बाबू की जो इमेज थी वह भी चकनाचूर हो चुकी तेजस्वी के 10 लाख नवजवानों को पक्की सरकारी नौकरी देने के एलान पर पहले तो उन्होंने जो आर्थिक सवाल खडा किया था और पूछा था कि इतने लोगों को सैलरी देंने के लिए पैसा कहाँ से आएगा उनके इस सवाल का सुशील मोदी ने भी समर्थन किया था लेकिन दूसरे ही दिन बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में 19 लाख लोगों को रोज़गार देने की बात कह के नितीश के सामने एक बड़ी कठिनाई पैदा कर दी यहाँ तक की उनके परम मित्र सुशील मोदी भी इस मामले में पलट गए I उधर योगी आदित्य नाथ CAA NRC और घुसपैठियों की बात करके नितीश के वोटरों को असमंजस में डाल रहे हैं जिसके कारण नितीश को एलान करना पड़ा कि कोई किसी को देश से नहीं निकाल सकता I नवजवानों के बीच यह सन्देश चला गया कि नितीश ने अपने पहले कार्यकाल में तो नौकरी दी नहीं अगले कार्यकाल के लिए नौकरी के नाम पर पल्ला झाड़ रहे हैं I नितीश सियासत के माहिर खिलाड़ी हैं वह समझ रहे हैं की बीजेपी इस बार उनके साथ दोहरा खेल खेल रही है चिराग पासवान के ज़रिये वह उनकी राजनीति के सामने बहुत बड़ी चुनौती पहले ही खड़ी कर चुकी है इसलिए उन्होंने इमोशनल कार्ड खेल कर अपनी साख और सत्ता बचने की कोशिश की है लेकिन बिहार में जो सियासी बयार चल रही है उससे लगता है कि उनका यह इमोशनल कार्ड कामयाब नहीं होगा I
नितीश के इस एलान पर विपक्ष ख़ास कर तेजस्वी यादव और चिराग पासवान को उन पर हमला करने का एक और मौक़ा मिल गया तेजस्वी ने कहा कि वह तो शुरू से कहते आ रहे हैं की नितीश जो अब थक गए हैं और वह बिहार जैसे राज्य का बोझ संभालने के लायक नहीं हैं उन्हें अब जनता आराम करने का मौक़ा दे I चिराग पासवान ने कहा कि नितीश जी अपने विगत 15 वर्षों का हिसाब नहीं दे पा रहे हैं और अगले पांच साल भी हिसाब देने की पोजीशन में नहीं होंगे इस लिए ऐसा एलान कर रहे हैं जनता ऐसे नेता को क्यों चुनेगी जो अगली बार अपने किये का हिसाब देने को मौजूद नहीं होगा I
नितीश का बयान उनकी हताशा और घबराहट का सुबूत हैं अपनी सुशासन बाबू की इमेज को उन्हों ने लालू यादव से गठबंधन तोड़ कर खुद समाप्त कर लिया अब उनकी इमेज एक अविश्वसनीय और मौक़ापरस्त नेता की हो गयी बीजेपी के साथ जाने के कारण प्रदेश के 18 % मुस्लिम वोटरों का विश्वास भी वह खो चुके हैं उनके सियासी जीवन का यह अंत दुखद होगा लेकिन इस के लिए वह खुद ज़िम्मेदार हैं कोई और नहीं I

