भारतीय संस्कृति में वृक्ष अत्यन्त पूजनीय: राज्यपाल

उत्तर प्रदेशभारतीय संस्कृति में वृक्ष अत्यन्त पूजनीय: राज्यपाल

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भारतीय संस्कृति में वृक्ष अत्यन्त पूजनीय: राज्यपाल

लखनऊः उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आज वन महोत्सव के अवसर पर आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में झाँसी के निकट सिमरधा डैम में सहभागिता करते हुए हरिशंकरी का पौधा रोपित कर वन महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मेरे लिये यह अत्यन्त प्रसन्नता की बात है कि आज मुझे वन महोत्सव सप्ताह के अवसर पर ऐतिहासिक नगरी झांसी की पहूंज नदी पर स्थित सिमरधा डैम के पास वृक्षारोपण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

उन्होंने कहा कि झांसी के लिए पहुंज नदी एवं सिमरधा डैम सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है। नदी पर बना हुआ सिमरधा डैम जलापूर्ति का मुख्य स्रोत है तथा इस डैम से निकली विभिन्न नहरों से लगभग 30 गावों में सिंचाई की जाती है। पर्यटन की दृष्टि से भी यहां का वातावरण बहुत मनोरम है। दूसरी ओर पहाड़ी पर स्थित विश्व विख्यात हाॅकी के जादूगर ध्यानचन्द्र जी की विशाल प्रतिमा हमारे युवाओं को प्रेरित करती है। यहां आकर ध्यानचन्द्र को श्रद्धांजलि अर्पित करना मैं अपना कर्तव्य समझती हूँ। ध्यानचंद जी ने 3 ओलम्पिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया तथा तीनों बार देश को स्वर्ण पदक दिलाया।

राज्यपाल ने कहा कि वन महोत्सव प्रकृति के उपकारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। हमारी समृद्ध संस्कृति व परम्परा में पेड़-पौधों को विशिष्ट स्थान प्राप्त है। भारतीय संस्कृति में वृक्षों को अत्यन्त पूजनीय माना जाता है। पीपल वनस्पति जगत में सर्वश्रेष्ठ है। नीम, आंवला, बरगद आदि वृक्ष औषधीय गुणों का भण्डार होने के साथ-साथ मानव सेहत को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज 4 जुलाई को 25 करोड़ पौधे एक दिन में ही लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रदेश सरकार का इतना बड़ा लक्ष्य आप सभी के सहयोग से ही पूर्ण किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेश को हरा-भरा बनाने एवं विकास पथ पर अग्रसर रखने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों के लिए प्रदेश सरकार की तारीफ की।

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