ओलंपिक में पहली बार पिस्टल लेकर रेंज पर निशाना लगाने उतरी मनु भाकर से सभी को मेडल की उम्मीद है. हालांकि मनु की पिस्टल ने ही उन्हें धोखा दे दिया. दरअसल, मनु की बंदूक का लिवर (जहां पेलेट फंसाई जाती है) टूट गया था. आमतौर पर ऐसा होता नहीं है क्योंकि यह कई सालों तक चलता है. मनु की बंदूक का लिवर टूटना एक चौंकाने वाली घटना थी. इसके चलते लिवर को निकालने के लिए पूरी ग्रिप को खोलना पड़ा. इसी ने भाकर को क्वालिफिकेशन में अड़चन पैदा की और वह फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाईं.
क्वालीफिकेशन में लगा पाईं कम शॉट
पूर्व भारतीय निशानेबाज हीना सिद्धू ने मनु की पिस्टल का विश्लेषण किया और बताया कि कैसे मनु के फाइनल्स तक पहुंचने में उनकी पिस्टल ही बाधा बन गई. हीना ने बताया कि स्पर्धा के बाद उन्होंने अपने पति व मनु के कोच रौनक पंडित से बात की थी. रौनक ने बताया कि मनु की बंदूक का लिवर (जहां पेलेट फंसाई जाती है) टूट गया था. हीना ने आगे बताया कि बंदूक में सॢकट ग्रिप के अंदर ही रहता है और ट्रिगर से भी जुड़ा रहता है. इसी सॢकट से बंदूक को चालू-बंद किया जाता है. इस तरह दूसरी बंदूक से लिवर बदलने के बाद जब बंदूक को चालू करने की कोशिश की गई, तब पता चला की उसका सॢकट भी खराब है, जिसे ठीक करने में और समय खराब होता चला गया. इस तरह कुल मिलाकर देखा जाए तो करीब 20 मिनट बंदूक सही करने में चले गए, जिससे वह क्वालीफिकेशन दौर में कम शॉट लगा पाईं.
..तो मेडल जीत जाती मनु
हीना ने कहा कि मनु ने शानदार खेल दिखाया और सिर्फ 14 शॉट में ही 575 अंक हासिल किए. क्वालिफिकेशन में शीर्ष पर रहने वाली निशानेबाज के अंक देखें तो उसने 23 शॉट में 587 अंक हासिल किए. इन आंकड़ों से साफ नजर आता है कि अगर उनकी बंदूक ना खराब होती तो वह फाइनल्स में जरूर जगह बनाती. अगर उसका यही प्रदर्शन फाइनल में भी रहता तो उसे मेडल जीतने से कोई नहीं रोक सकता.

