देहरादून। उत्तराखंड के 7 सांसदों में गढ़वाल से सांसद तीरथ सिंह रावत दूसरे सांसदों से आगे है। बात जब आदर्श ग्राम योजना की हो तो तीरथ सबसे आगे खड़े है। बाकी सांसद पीएम मोदी की इस योजना को लेकर गंभीर नही दिख रहे है। यही नही उत्तराखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर उनके ही सांसद ही पलीता लगाते नजर आ रहे हैं। उत्तराखंड से भाजपा के 7 सांसद आदर्श ग्राम योजना को लेकर गंभीर नही है। 7 में से केवल 3 ही सांसद ऐसे है जो आदर्श गांव की सूची भेजने में सफल हुए। दरसअल 2019 से लेकर 2024 तक सांसदों को आदर्श ग्राम की सूची भेजनी थी।
जिसमे केवल गढ़वाल से सांसद तीरथ सिंह रावत ही सबसे आगे रहे उन्होंने पांच गाँव की सूची भेजी,नैनीताल से सांसद अजय भट्ट केवल 4 चार गांव की सूची ही भेज पाए। प्रदीप टम्टा 3 गांव के नाम ही चुन पाए। इनसे अलग टिहरी के सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह अभी तक केवल एक ही गांव का नाम भेज पाई है। रानी ने रायपुर विकासखंड के क्यारा गांव को आदर्श गांव के रूप में चुना। पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तराखंड से पूर्व मुख्यमंत्री रहे रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी और नरेश बंसल अभी तक एक भी गांव का चयन नहीं कर पाए हैं।
हालांकि सांसद प्रदीप टम्टा इस योजना को तर्क संगत नही मानते है । नरेश बंसल सांसदों के रवैये के बचाव करते हुए कहते है कि उनके पास जो सूची भेजी गई थिसमे कुछ नामो को लेकर आपत्ति थी इसलिए उन्होंने इसे वापस करते हुए पुनर्विचार को कहा है। उन्होंने कहा कि जैसे ही नाम आएंगे वैसे ही उनके द्वारा उन गांव में विकास कार्य शुरू हो जाएंगे।

