बुधवार को महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान के दिन एक जगह पर नहीं बल्कि दो जगहों पर भगदड़ मची थी और दोनों ही स्थानों पर लोगों की मौतें हुई थी। संगम नोज पर मची भगदड़ में सरकार ने 30 लोगों की मौत होने की बात मानी है वहीँ इस घटना के कुछ घंटे बाद संगम तट से 3 किलोमीटर दूर झूसी घाट पर हुई इस भगदड़ में १० लोगों की मौत हो गई। हालाँकि प्रशासन ने 24 घंटे बाद सात लोगों के मरने की बात मानी है.
बता दें कि संगम नोज़ के पास हुई भगदड़ में 30 लोगों के मरने की बात पुलिस और प्रशासन ने दिन भर छुपाये रखी लेकिन जब मामला हाथ से निकल गया और सोशल मीडिया लाशों के वीडियो वायरल हो गए तब शाम को जाकर इस भगदड़ में में लोगों के मरने की बात स्वीकार की गयी. सरकार की इस हरकत से संत समाज में काफी रोष पैदा हुआ है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरा नन्द ने प्रधानमंत्री मोदी से योगी आदित्यनाथ को महाकुम्भ प्रबंधन से हटाने की मांग भी की.
ठीक इसी तरह संगम तट से 3 किलोमीटर दूर झूसी घाट पर हुई घटना को को भी 24 घंटे तक छुपाये रखा गया और यहाँ भी जब तस्वीरें और वीडियोज़ सामने आये, प्रत्यक्षदर्शियों के बायां सामने आये तब कल्पवासी पुलिस स्टेशन के सर्किल ऑफिसर रुद्र कुमार सिंह ने मीडिया को जानकारी दी की अत्यधिक भीड़ के दबाव के कारण झूसी में घटनास्थल पर सात लोग मृत पाए गए।

