NIA जांच में खुलासा — फरीदाबाद से आए आरोपियों ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों की गुपचुप रेकी की
सुनसान जगह पर विस्फोटक तैयार करने की थी तैयारी, 7500 पन्नों की चार्जशीट में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
राजधानी लखनऊ को बड़े आतंकी हमले से दहलाने की साजिश का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। लालकिला के पास हुए कार बम विस्फोट मामले की जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को ऐसे अहम सुराग मिले हैं, जिनसे पता चला है कि आतंकियों की नजर लखनऊ के कई महत्वपूर्ण और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर थी। जांच में सामने आया है कि विधानसभा, बापू भवन, बड़ा इमामबाड़ा, लालबाग और अमीनाबाद जैसे स्थान संभावित टारगेट बनाए गए थे।
सूत्रों के मुताबिक, आतंकी हमले का मकसद सिर्फ धमाका करना नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे और आम जनजीवन में भय का माहौल पैदा करना था। जांच एजेंसियों को मिले इनपुट से साफ है कि पूरी योजना बेहद सुनियोजित तरीके से तैयार की जा रही थी।
मामले में दो मुख्य आरोपितों डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि दोनों अगस्त 2025 के आखिरी सप्ताह में फरीदाबाद से लखनऊ पहुंचे थे। यहां वे शाहीन के एक रिश्तेदार के घर पर रुके और कई दिनों तक शहर के संवेदनशील इलाकों में घूमकर गतिविधियों का जायजा लेते रहे।
एनआईए की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी शहर में ऐसी जगह तलाश रहे थे, जहां बिना किसी शक के विस्फोटक सामग्री तैयार की जा सके। एजेंसियों का मानना है कि रेकी के बाद अगले चरण में धमाकों की पूरी रणनीति पर काम होना था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों ने भीड़भाड़ वाले इलाकों के साथ सरकारी परिसरों को इसलिए चुना था ताकि कम समय में ज्यादा दहशत फैलाई जा सके। यही वजह है कि अब जांच एजेंसियां आरोपितों के संपर्कों, फंडिंग और उनके नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं।
इस पूरे मामले में NIA ने 14 मई को करीब 7500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में लखनऊ में संभावित आतंकी हमले, रेकी और संदिग्ध गतिविधियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। खुलासे के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता दोनों बढ़ा दी गई हैं।

