- पैगमबर साहब के नाम पर उनकी शिक्षाओं के विरुद्ध काम किया जा रहा है
उबैद उल्लाह नासिर

फ्रांस में पैगम्बर मोहम्मद (स) के कार्टून दिखाने पर पहले एक क्षात्र द्वारा अपनी टीचर की गला काट कर हत्या और फिर उसके बाद तीन अन्य लोगों की हत्याए अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बन गयीं क्योंकि फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुएल मैक्रो ने इसे इस्लामी आतंकवाद से जोड़ते हुए कहा की इस्लाम हमारा भविष्य हथियाना चाहता है जिसे हम कभी सफल नहीं होना देंगे I बात यंही तक होती तो फिर ठीक था उन्होंने इस विवादास्पद कार्टून के सार्वजनिक प्रदर्शन का भी एलान किया जिस से कई मुस्लिम देश उनके विरोधी हो गए इन में सब से आगे है टर्की और उसके राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दगान और पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान I मलेशिया के पूर्व प्रधान मंत्री महाथिर मोहम्मद ने भी फ्रांस की कटु आलोचना करते हुए कहा की फ्रांस ने पूर्व में अपनी अरब और अफ्रीकी कॉलोनियों में वहां के अवाम पर जो अत्याचार किये वह अभी दुनिया भूली नहीं है I मैक्रो के बयान पर कई अरब देशों ने भी तीव्र प्रतक्रिया दी है और फ्रांस के उत्पादों के बॉयकॉट का एलान किया है I कुवैत के गैर सरकारी कोआपरेटिव संगठन ने इस बॉयकॉट के सिलसिले में दिशा निर्देश जारी किये हैं क़तर ने फ्रांस के राष्ट्रपति के रवय्ये को इस्लाम के खिलाफ बताते हुए वहां की युनिवर्सिटी में होने वाले फ्रेंच सांस्कृतिक सप्ताह का प्रोग्राम अनिश्चित काल के लिए टाल दिया है सऊदी अरब में 57 देशों की इस्लामिक संगठन ने फ्रांस की आलोचना करते हुए कहा की अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर आप किसी धर्म की ईश निंदा (Blasphemy) नहीं कर सकते I टर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दगान ने तो फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुएल मैक्रो को मानसिक बीमार बताते हुए उनको अपने दिमाग का इलाज करने की सलाह तक दे डाली I मुस्लिम देशों की इस प्रतिक्रिया के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति का रवय्या कुछ नर्म हुआ है उन्होंने कहा कि” मेरे बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है मैं इन कार्टूनों की हिमायत नहीं करता और मुसलमानों की भावनाओं का आदर करता हूँ मेरी लड़ाई कट्टरता पसंद इस्लाम के खिलाफ है जो इस्लाम को गलत अंदाज़ में पेश कर रहे हैं “I
दूसरी ओर भारत समेत कई यूरोपी देशों ने फ्रांस की हिमायत की हैऔर अभिव्यक्ति की आज़ादी को हर हाल में संरक्षित रखने की बात कही है लेकिन कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रडू ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी असीमित नहीं हो सकती ( Freedom of expression is not without limitations) I
इस समस्या को लेकर दो मौलिक सवाल खड़े हुए हैं, एक है कार्टून के नाम पर हिंसा का जिसे किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराया जा सकता और न ही इस्लाम में इसकी इजाज़त है I वास्तव में पैगम्बर मोहम्मद ( स) की जीवनी और शिक्षाएं तो मानवता प्रेम बंधुत्व और क्षमा की रही हैं I मशहूर वाक्या तो वही है जिसे सारी दुनिया जानती है कि किस प्रकार पैगम्बर साहब उस बुढ़िया को देखने गए और उसके पास पानी न होने पर दूर जाकर उसके लिए पानी लाए जो रोज़ उन पर कूड़ा फेंकती थी I क्षमा शीलता और मानवता की इससे बड़ी मिसाल और क्या हो सकती हैI उनके स्वर्गवास के बाद उनके महान अनुयाइयों ( सहाबा ) ने भी कभी किसी को ऐसी कोई सज़ा नहीं दी I इस्लाम के फौजदारी कानून की कुरान और हदीस की रौशनी में व्याख्या करने और लागू कराने वाले पाँचों बड़े इमामों इमाम अबू हनीफा, इमाम शाफई, इमाम गजाली, इमाम इब्ने हम्बल, और इमाम जाफर सादिक ने अपने किसी फतवे में पैगम्बर साहब की आलोचना या निंदा यहाँ तक कि उनकी शान में गुस्ताखी करने वाले तक को कोई सज़ा देने की बात नहीं कही, न ही किसी मुस्लिम शासक ने किसी को ऐसी कोई सज़ा दी I यह सिलसिला शुरू हुआ कई सौ वर्षों बाद जब इसाई पादरियों की पैगम्बर साहब पर अनर्गल बातों और गाली गलौज का सिलसिला बहुत बढ़ गया तो इब्ने तिमिया नाम के मुस्लिम विचारक ने पैगम्बर साहब की शान में गुस्ताखी की सज़ा मौत तजवीज़ की लेकिन उस पर अमल के बहुत कम सुबूत मिलते हैं I आधुनिक युग में ईरान के इमाम खोमैनी ने विवादस्पद लेखक सलमान रुश्दी की विवादित किताब सैटेनिक वर्सेज़ पर उसके खिलाफ क़त्ल का फतवा दिया जबकि पाकिस्तान ने अत्यंत अमानवीय और असभ्य ईशनिंदा कानून बना के उसमें फांसी की सज़ा का प्रावधान रखा I वहां इस कानून का कितना दुरूपयोग हो रहा और न केवल गैर मुस्लिम बल्कि मुस्लिम भी इसके दुरूपयोग का शिकार हो रहे है यह किसी से छुपा नहीं है I पाकिस्तान की सिविल सोसाइटी और प्रगतिशील वर्ग इस कानून में सुधार की आवाज़ उठा रहा है लेकिन धर्मान्धों का ऐसा गलबा है और ऐसा माहौल है कि सुधार की मांग करने वाले पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर को उन्ही के सुरक्षा गार्ड ने गोली मार दी और जब इस हत्यारे को फांसी हुई तो उसके जनाज़े के जुलूस में लाखों लोगों की भीड़ इकठ्ठा हुई थी I यह तो बिल्कुल साफ़ है कि पैगम्बर साहब के नाम पर हत्या करना खुद पैगम्बर साहब की जीवनी और उनकी शिक्षाओं के खिलाफ है इसलिए हत्या न तो धार्मिक कृत्य है और न ही इसका कोई औचित्य है I पैगम्बर साहब की ईश निंदा और ऐसी हरकतों के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक ढंग से प्रोटेस्ट किया जाना चाहिए और गैर मुस्लिमों के बीच जा कर उनको इस्लाम,पैगमबर साहब की जीवनी और शिक्षाओं के बारें विस्तार से बताना चाहिये I हिंसा का सहारा लेकर इस्लाम, पैगमबर इस्लाम और उनकी शिक्षाओं को अपमानित ही किया जा रहा है I
दूसरी ओर अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात है जो सभ्य समाज का अटूट हिस्सा हैऔर जिसके बगैर न लोकतंत्र की कल्पना की जा सकती है और न ही एक सभ्य समाज की I इसकी रक्षा करना हर उस व्यक्ति और व्यवस्था की ज़िम्मेदारी है जो समाज को सभ्यता और लोकतंत्र की बुनियाद पर चलाना चाहते हैं I “हम आपकी बातों और विचारों के विरोधी है लेकिन अपनी बात कहने और अपने विचार रखने के आप के अधिकार के लिए मैं अंतिम सांस तक लडूंगा” अभिव्यक्ति की आज़ादी को अक्षुण रखने के लिए यह कहावत बहुत प्रचलित है लेकिन जैसा कि कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा की अभिव्यक्ति की आज़ादी असीमित नहीं हो सकती एक दूसरी कहावत में उसे इस प्रकार परिभाषित किया गया है “ आप के हाथ की आज़ादी वहां खत्म हो जाती है जहां से हमारी नाक शुरू होती है “ I सभ्य समाज को दुसरे की नाक का भी ध्यान रखना चाहिए और कोई उकसाने वाला और भावनाएं भड़काने वाला काम नहीं करना चाहिए यही शांति पूर्ण सह अस्तित्व का तकाजा है I
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