5 साल बाद भी नहीं बदले उत्तरप्रदेश के हालात, कम उम्र में ही बेटियां बन रहीं माँ

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5 साल बाद भी नहीं बदले उत्तरप्रदेश के  हालात, कम उम्र में ही बेटियां बन रहीं माँ

  • 15 से 19 साल की उम्र में माँ बनने के आंकड़े में मात्र 1 फीसदी ही दर्ज हुई गिरावट
  • परिवार स्वास्थ्य व कल्याण मंत्रालय द्वारा करवाए गए राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट हुआ खुलासा

अमित बिश्नोई

पढ़ने लिखने की उम्र में उत्तरप्रदेश में बेटियां माँ बन रहीं हैं। कच्ची उम्र में सपनों में रंग भरने की बजाय उनकी गोद में शिशु और ससुराल की जिम्मेदारियों का बोझ उनके कंधों पर आ चुका है। प्रदेश में बेटियों को बढ़ाने और पढ़ाने को लेकर तमाम योजनाएं और दावे गढ़े गए , लेकिन कम उम्र में मां बन रही बेटियों के आंकड़े इसकी पोल खोल रहे हैं। बीते 5 साल की बात करें तो इनके आंकड़ों में 1 फ़ीसदी से भी कम गिरावट आयी है। ये खुलासा परिवार व स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय की ओर से करवाए गए ताजा राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 की रिपोर्ट में हुआ है।

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2.9 प्रतिशत आबादी कम उम्र में बनी माँ

सर्वेक्षण 2019-21 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में आज भी 2.9 प्रतिशत आबादी ऐसी लड़कियों की है, जो 15 से 19 साल की उम्र में या तो गर्भवती हो गई या मां बन चुकी हैं। जबकि राष्ट्रीय परिवार व स्वास्थ्य सर्वेक्षण-चार यानी वर्ष 2015-16 में हुए सर्वे रिपोर्ट में कम उम्र में मां बन रही लड़कियों का प्रतिशत 3. 8 था। स्थिति चिंताजनक है। बीते पांच साल में इसमें मात्र 0.9 फीसदी ही कमी आयी है।

गांवों में स्थिति चिन्तानजक

उत्तर प्रदेश के गांव में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यूपी के गांव में रहने वाली 3.3 फीसदी आबादी ऐसी है जो कम उम्र में ही माँ बन रही हैं। जबकि शहरों में भी हालात बहुत अच्छे नहीं है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार 15 से 19 साल की लड़कियों की 1.5 प्रतिशत आबादी आज भी पढ़ने-लिखने की उम्र में किताबों की बजाय ब्याही जा रही है। मात्र 15 से 19 साल की उम्र में ही मां भी बन जा रही हैं।

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बाल विवाह में सुधार,घटा 5.3 प्रतिशत आंकड़ा

यूपी में कम उम्र में लड़कियों को बिहाने की स्थिति में हालांकि सुधार हुआ है 2015-16 में बाल विवाह का आंकड़ा 21.1 फीसदी था वहीं 2019-21 में 18 साल से कम उम्र की लड़कियों का शादी का प्रतिशत 15.8 तक आ गया है। यानी 5 साल में 5.3 प्रतिशत सुधार इसमें दर्ज किया गया है। हालांकि गांवों में आज भी सोचनीय है। यहां कुल आबादी का 17.9 प्रतिशत ऐसा है जो बाल विवाह का शिकार है। जबकि शहरों में ये स्थिति 9.6 फीसदी है

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