प्रियंका कर रहीं मेहनत, राहुल फेर रहे पानी

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प्रियंका कर रहीं मेहनत, राहुल फेर रहे पानी

  • हिंदू और हिंदुत्ववाद को लेकर बयान देकर राहुल गांधी हिंदू मतदाताओं को कांग्रेस से कर रहे दूर

सुनील शर्मा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए करो या मरो के समान है। एक समय उत्तर प्रदेश में एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस आज राजनीतिक जमीन तलाश रही है। कई दशकों से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस लगातार रसातल की ओर जा रही थी। इसके बाद कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी ने कमान संभाली और कांग्रेस को पुनर्गठित करने में जुट गईं। अपनी कड़ी मेहनत और तीखे तेवरों से प्रियंका गांधी ने जल्द ही कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में पुनः स्थापित कर लिया। हाथरस कांड हो या लखीमपुर खीरी हिंसा, प्रियंका गांधी ने सभी प्रकरणों में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रियंका गांधी की रणनीति इस कदर सोची-समझी थी कि उसने भाजपा के साथ अन्य विपक्षी दलों को भी सकते में डाल दिया। हालात यह हो गए की प्रियंका गांधी ने जब-जब भाजपा पर हमला बोला तब-तब सपा और बसपा के नेताओं ने योगी सरकार की विफलता से अधिक कांग्रेस की सक्रियता पर सवाल उठाये। निसंदेह यह प्रियंका गांधी के बढ़ते कद और जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा ही नहीं बल्कि अन्य विपक्षी दलों की हताशा को दर्शाता है।

बेहतर रणनीति और प्रबंधन का उदाहरण पेश करते हुए प्रियंका गांधी ने यूपी विधानसभा चुनाव में महिला वोटरों पर ध्यान केंद्रित किया और पार्टी के 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने का ऐलान कर दिया। छात्राओं को स्कूटी और स्मार्टफोन देने के ऐलान के साथ महिलाओं के हित में अनेक घोषणाएं भी कीं। प्रियंका गांधी की लोकप्रियता का ग्राफ दिनों-दिन बढ़ता चला जा रहा है।

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मगर प्रियंका गांधी की दिन-रात की कड़ी मेहनत और रणनीति पर पानी फेरने में राहुल गांधी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव के लिये कांग्रेस के अभियान से दूर बैठे राहुल गांधी अपने बयानों से विपक्ष की बजाए अपनी ही पार्टी को संकट में डाल रहे हैं। सलमान खुर्शीद की किताब में हिंदुत्व की तुलना आतंकी संगठनों से किए जाने के बाद उठे विवाद में राहुल गांधी, सलमान के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। इस विवाद के बाद राहुल गांधी ने हिंदू और हिंदुत्व पर लेकर विवादास्पद बयान देने शुरू कर दिए। अभी हाल में ही राहुल गांधी ने खुद को हिंदू बताया मगर हिंदुत्ववादी होने से इंकार कर दिया। अब राहुल गांधी के इस बयान के क्या मायने हैं वह तो राहुल गांधी ही बेहतर समझ सकते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में धर्म पर टिप्पणी करने को लेकर प्रत्येक राजनीतिक दल बेहद सतर्कता बरतता है। क्योंकि उत्तर प्रदेश के चुनाव मुख्यतः हिंदू-मुस्लिम मतदाताओं पर ही केंद्रित होते हैं। ऐसे में किसी के भी धर्म के ऊपर टिप्पणी करना किसी भी दल के लिए भारी पड़ सकता है।

ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बात को जानते नहीं हैं। हाल ही कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी धर्म को लेकर की जा रही टिप्पणी पर कहा था कि जिन लोगों को चुनाव नहीं लड़ना वह हमें परेशानी में क्यों डाल रहे हैं? जब अन्य राजनीतिक दल किसी भी धर्म के ऊपर टिप्पणी नहीं करते तो हमें ऐसा करने की जरूरत क्या है? मनीष तिवारी का यह कहना राहुल गांधी के बयानों से परेशानी में आने वाली कांग्रेस की बेबसी को जता रहा है। वरिष्ठ नेता होने के कारण कांग्रेस पदाधिकारी उनके खिलाफ सीधे तौर पर कुछ कहने से परहेज कर रहे हैं। लेकिन अंदरखाने वह जानते हैं कि राहुल गांधी, हिंदू और हिंदुत्व को लेकर जितना ज्यादा बयान देंगे हिंदू वोटर उनसे उतना ही दूर होता चला जाएगा।

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एक समय ब्राह्मणों की पार्टी कहे जाने वाली कांग्रेस से आज यदि ब्राह्मण वोटर दूर हो चला है तो उसका मुख्य कारण कांग्रेस की हिंदू वोटरों की उपेक्षा और अल्पसंख्यकों को बढ़ावा देना ही रहा है। राहुल गांधी के हिंदू होने को लेकर भी विपक्ष अक्सर आरोप लगाता रहा है। लेकिन इससे इतर राहुल गांधी का हिंदू और हिंदुत्व को अलग-अलग बातें बताना और खुद को हिंदू बताकर हिन्दुत्ववादी न होने का बयान उनको विवादों के कटघरे में खड़ा कर देता है।

कहावत है कि गलत समय पर कहीं गई सही बात भी गलत ही होती है। हो सकता है कि राहुल गांधी कहना कुछ और चाहते हो और समझा कुछ और जाता हो। लेकिन यदि ऐसा भी हो रहा है तो इसमें गलती राहुल गांधी की ही है कि वह अपने बयानों को लेकर स्पष्ट संदेश नहीं दे पा रहे हैं। इससे हिंदू मतदाताओं में गलत संदेश जा रहा है जो आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा।

राहुल गांधी के बयान प्रियंका गांधी को भी मुश्किल में डाल रहे हैं। राहुल गांधी के समान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी भले ही मोदी-योगी सरकार पर निशाना साधती हों या सपा-बसपा पर अनेक आरोप लगाती हों मगर उन्होंने अपने भाषणों में या बयानों में अब तक किसी भी धर्म को लेकर विवादास्पद टिप्पणी नहीं की है। प्रियंका गांधी इस बात को बेहतर समझती हैं कि किसी की भी धार्मिक भावनाओं को दी गई चोट उसे पार्टी से हमेशा के लिए दूर कर देगी। इसलिए प्रियंका गांधी धर्म को लेकर बयान देने पर सतर्कता बरत रहीं हैं। कांग्रेस में भले ही हिंदू और हिंदुत्ववाद को लेकर बहस चल रही हो लेकिन प्रियंका गांधी ने अब तक खुद को इस दलदल में फंसने से बचाए रखा है। निसंदेह यह एक परिपक्व नेता की पहचान है जो पार्टी को पुनः स्थापित करने के प्रति प्रयासरत हैं।

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परंतु प्रियंका गांधी के भाई राहुल गांधी के बयान ना चाहते हुए भी प्रियंका के चुनावी अभियान को प्रभावित अवश्य करेंगे। क्योंकि प्रियंका गांधी भले ही खुद हिंदू और हिंदुत्व को लेकर बयान ना दे रही हों मगर अपने भाई या कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बयानों का खंडन भी नहीं कर रही हैं। ऐसे में मतदाताओं में यह भी संदेश जा रहा है कि कहीं ना कहीं प्रियंका गांधी भी राहुल गांधी, सलमान खुर्शीद, राशिद अल्वी की हिंदुत्व को लेकर की जा रही बयानबाजी से सहमत हैं।

अगर कांग्रेस के नेताओं की धर्म को लेकर की गई बयानबाजी इसी प्रकार जारी रही तो कांग्रेस का यूपी विधानसभा चुनाव अभियान बेमानी साबित हो जाएगा। और यदि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस नाकाम रही तो केंद्र की सत्ता तक पहुंचना उसके लिए मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा हो जाएगा। अगर कांग्रेस को फिर से संगठित और स्थापित करना है तो सबसे पहले वरिष्ठ नेताओं द्वारा धर्म पर की जा रही बयानबाजी को अवश्य ही रोकना होगा। अन्यथा हिंदू मतदाता कांग्रेस के पास नहीं फटकेगा और मुस्लिम मतदाता का रुझान अभी तक कांग्रेस की ओर नहीं दिख रहा है। ऐसे में कांग्रेस को नुकसान और प्रियंका गांधी की मेहनत पर पानी फिरना तय है।

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