नवंबर तक गरीबों को मिलता रहेगा मुफ्त अनाज

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नवंबर तक गरीबों को मिलता रहेगा मुफ्त अनाज

प्रधानमंत्री का देश के नाम सम्बोधन, कहा–समय पर किए गए लॉकडाउन से लाखों लोगों का जीवन बचाया गया

नई दिल्ली: कोरोना संकट और सीमा पर चीन के साथ तनातनी के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ते लड़ते अब हम अनलॉक-टू में प्रवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही हम उस मौसम में भी प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें सर्दी जुकाम खांसी बुखार आदि बढ़ जाते हैं। मेरी आप सबसे प्रार्थना है कि ऐसे समय में अपना ध्यान रखें। अगर हम कोरोना से होने वाली मौतों की तुलना करें तो हम संभली हुई स्थिति में है।

पीएम ने कहा, ‘आज मै इसी से जुड़ी एक महत्वपूर्व घोषणा करने जा रहा हूं. हमारे यहां वर्षा ऋतु के दौरान कृषि क्षेत्र में ही मुख्य तौर पर ज्यादा काम होते है. अब देखिए सावन महीने के शुरू होते ही त्योहार शुरू हो जाते हैं. त्योहारों का यह समय जरूरत भी बढ़ता है और खर्च भी बढ़ाता है. हमने अब फैसला किया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार अब दिवाली और छठ पूजा यानि नवंबर महीन के आखिरी तक कर दिया जाएगा|

सरकार द्वारा इन पांच महीनों के दौरान 80 करोड़ लोगों को सरकार द्वारा 5 किलो गेंहू या 5 किलो चावल मुफ्त दिया जाएगा. इसके अलावा प्रत्येक परिवार को एक किलो चना भी मुफ्त दिया जाएगा. इस योजना में 90 हजार करोड़ रुपए खर्च होगा. अगर इसमें पिछले तीन महीनों को खर्च भी जोड़ दें तो ये 1.50 लाख करोड़ रु हो जाता है.’

पीएम मोदी ने कहा कि समय पर हुए लॉकडाउन और अन्य फैसलों ने भारत में लाखों लोगों का जीवन बचाया है, लेकिन हम यह भी देख रहे हैं, कि जब से देश में अनलॉक वन हुआ है व्यक्तिगत और सामजिक तौर पर लापरवाही बढ़ती ही चली गई है। पहले हम मास्क को लेकर दो गज की दूरी को लेकर बीस सेकंड दिन में कई बार हाथ धोने को लेकर बहुत सतर्क थे लेकिन आज जब हमें ज्यादा सतर्कता की जरूरत है तो लापरवाही बढ़ना चिंता का कारण है।

सम्बोधन की ख़ास बातें

  • मैं आप सब से प्रार्थना करता हूं, आपके लिए भी प्रार्थना करता हूं, आपसे आग्रह भी करता हूं, आप सभी स्वस्थ रहिए, दो गज की दूरी का पालन करते रहिए, गमछा, फेस कवर, मास्क ये हमेशा उपयोग कीजिये, कोई लापरवाही मत बरतिए।
  • अब पूरे भारत के लिए एक राशन-कार्ड की व्यवस्था भी हो रही है। यानि एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड। इसका सबसे बड़ा लाभ उन गरीब साथियों को मिलेगा, जो रोजगार या दूसरी आवश्यकताओं के लिए अपना गांव छोड़कर के कहीं और जाते हैं।
  • सरकार द्वारा इन पांच महीनों के लिए 80 करोड़ से ज्यादा भाई-बहनों को 5 किलो गेहूं या 5 किलो चावल मुफ्त दिया जाएगा। साथ ही हर परिवार को हर महीने 1 किलो चना भी मुफ्त दिया जाएगा। इस योजना के विस्तार में 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे।
  • 80 करोड़ लोगों को अब नवंबर तक मुफ्त अनाज दिया जाएगा। इसका श्रेय देश के मेहनती किसान और ईमानदार करदाताओं को जाता है।
  • इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार अब दीवाली और छठ पूजा तक, यानि नवंबर महीने के आखिर तक कर दिया जाए।
  • हमारे यहां वर्षा ऋतु के दौरान और उसके बाद मुख्य तौर पर एग्रीकल्चर सेक्टर में ही ज्यादा काम होता है। अन्य दूसरे सेक्टरों में थोड़ी सुस्ती रहती है। जुलाई से धीरे-धीरे त्योहारों का भी माहौल बनने लगता है। त्योहारों का ये समय, जरूरतें भी बढ़ाता है, खर्चे भी बढ़ाता है।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों के लिए पौने दो लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया। बीते 3 महीनों में 20 करोड़ गरीब परिवारों के जनधन खातों में सीधे 31 हजार करोड़ रुपए जमा करवाए गए। 9 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपए जमा हुए हैं।
  • आज मैं एक महत्वपूर्ण घोषणा करने जा रहा हूं। हमारे यहां वर्षा के दौरान कृषि के क्षेत्र में ही ज्यादा काम होता है। जुलाई से धीरे-धीरे त्यौहार का मौसम शुरू होने लगता है।
  • कोरोना से लड़ते हुए लोगों को तीन महीने का राशन मुफ्त दिया गया। प्रत्येक परिवार को हर महीने एक किलो दाल भी मुफ्त दी गई। अमेरिकी की कुल जनसंख्या से तीन गुना अधिक लोगों को हमारी सरकार ने मुफ्ता अनाज दिया है।
  • लॉकडाउन होते ही सरकार पौने दो लाख करोड़ रुपए का आर्थिक पैकेज लेकर आई। लॉकडाउन के दौरान देश की सर्वोच्च प्राथमिकता रही कि ऐसी स्थिति न आए कि किसी गरीब के घर में चूल्हा न जले। केंद्र सरकार हो, राज्य सरकारें हों, सिविल सोसायटी के लोग हों, सभी ने पूरा प्रयास किया कि इतने बड़े देश में हमारा कोई गरीब भाई-बहन भूखा न सोए।
  • पहले हम मास्क को लेकर, दो गज की दूरी को लेकर, 20 सेकेंड तक दिन में कई बार हाथ धोने को लेकर बहुत सतर्क थे। अब सरकारों को, स्थानीय निकाय की संस्थाओं को, देश के नागरिकों को, फिर से उसी तरह की सतर्कता दिखाने की जरूरत है।

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