नई दिल्ली: बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में बैंक यूनियनों की हड़ताल के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के जिन बैंकों के निजीकरण की संभावना है, उनके कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब में उन्होंने साफ किया कि बैंकिंग क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की मौजूदगी बनी रहेगी.
सभी का निजीकरण नहीं
वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने पब्लिक एंटरप्राइज पॉलिसी का एलान किया है. इसके आधार पर उन्होंने उन चार क्षेत्रों की पहचान की है, जहां सरकार की मौजूदगी रहेगी. यह स्थिति वित्तीय क्षेत्र में भी रहेगी. उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि वित्तीय क्षेत्र में भी वे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के रूप में मौजूद रहेंगे. सभी का निजीकरण नहीं होने जा रहा है.
कर्मचारियों के हितों की रक्षा
सीतारमण ने कहा कि यहां तक कि जिन इकाइयों का निजीकरण होगा, सरकार यह सुनिश्चित करेगी ये निजी संस्थान काम करते रहें. निजीकरण के बाद, वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जो भी कर्मचारी वहां काम कर रहे हैं, उनके हितों की पूरी तरह से रक्षा हो. वित्त मंत्री ने 1 फरवरी को अपने बजट भाषण में एलान किया था कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों और एक साधारण बीमा कंपनी का 2021-22 में निजीकरण का प्रस्ताव करती है.

