माॅब लिचिंग के दोषी को मिलेगी मौत की सजा

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माॅब लिचिंग के दोषी को मिलेगी मौत की सजा

  • झारखंड विधानसभा में विधेयक पास, बीजेपी ने बताया झारखंड विरोधी बिल

रांची। पश्चिम बंगाल के बाद अब झारखंड में भी प्रिवेंशन आफ लिचिंग एक्ट लागू किया जाएगा। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चैथे दिन राज्य में भी भीड़ हिंसा और भीड़ लिचिंग निवारण विधायक 2021 पास हो गया है। वहीं इस विधेयक के विरोध में आए भाजपा ने यह कानून बनाकर सरकार पर तुष्टिकरण करने का आरोप लगाया।

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झारखंड विधानसभा द्वारा पास किए गए विधेयक के अनुसार यदि झारखंड में भीड़ द्वारा किसी की हत्या की जाती है तो दोषियों को मौत की सजा मिलेगी। आरोपी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। हमले में चोट आने पर 3 साल तक की सजा और 1 से लेकर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। वहीं हिंसा में चोट आने पर आरोपी को 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा और 3 से लेकर 6 लाख रुपये तक का जुर्माने की सजा दी जा सकती है। यह कानून पश्चिम बंगाल में पहले से ही लागू है और अब झारखंड में भी इस कानून को लागू किया जा रहा है।

राज्य सरकार की ओर से इस बिल को लाने का उद्देश्य झारखंड के लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा बताया जा रहा है। इस बिल के अंतर्गत लिचिंग करने की साजिश रचने वाले या लिचिंग करने के लिए उकसाने वाले को भी लिचिंग करने वाले अपराधी की तरह ही सजा मिलेगी। लिचिंग के अपराध से जुड़े किसी साक्ष्य को नष्ट करने वाले व्यक्ति को भी अपराधी मानकर 1 साल की सजा और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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वही भाजपा ने इस बिल के विरोध में विधानसभा में जमकर हंगामा किया। भाजपा विधायक अमित मंडल का कहना है कि पूरे झारखंड में सरकार का यह काला अध्याय लिखा जाएगा। इस बिल को तैयार करने वाले अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठाते हुए अमित मंडल ने कहा कि इसमें भीड़ को अंग्रेजी में माॅब जिसको दो या दो से अधिक लिखा गया है। दो व्यक्तियों को माॅब किस आधार पर लिखा गया है? अमित मंडल का आरोप है कि यह सरकार को खुश करने के लिए आईएएस अधिकारियों का किया कारनामा है। वही अमर बावरी ने इसे विशेष वर्ग के तुष्टीकरण के लिए आदिवासी भाइयों पर अत्याचार और झारखंड विरोधी बिल बताया।

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