सोशल मीडिया पर भारतीय भाषाओं का वर्चस्व कायम- प्रो. केजी सुरेश

मेरठ रीजनसोशल मीडिया पर भारतीय भाषाओं का वर्चस्व कायम- प्रो. केजी सुरेश

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सोशल मीडिया पर भारतीय भाषाओं का वर्चस्व कायम- प्रो. केजी सुरेश

सुभारती पत्रकारिता काॅलेज में हुआ राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन

भारतीय भाषाओं में शिक्षा और भाषाई पत्रकारिता के नए सोपान विषय पर विर्मश

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के गणेश शंकर विद्यार्थी सुभारती पत्रकारिता एवं जनसंचार महाविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में श्भारतीय भाषाओं में शिक्षा और भाषाई पत्रकारिता के नए सोपान विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।

इस विचार आयोजन में भारत के प्रमुख शिक्षाविदों के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों, अध्ययन-अध्यापन तथा अनुसंधान के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त विद्जनों ने भाग लिया।

मुख्य अतिथि के दौर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नामित कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने अपने सारगर्भित संबोधन में भारतीय भाषाओं के उज्जवल भविष्य की ओर संकेत किया। उनका कहना है कि विदेशी कम्पनियां भी भारतीय भाषाओं में निवेश कर रही हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां भारतीय भाषाओं का वर्चस्व कायम है। औद्योगिक जगत भी भारतीय भाषाओं को मान्यता देने लगा है। प्रो. संजय द्विवेदी ने भारतीय भाषाओं की स्वीकार्यता तथा उसके व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय भाषाएं विश्व की समस्त भाषाओं से अधिक समृद्ध तथा जन प्रचारित हैं।

उद्घाटन सत्र में प्रथम वक्ता के रूप में वरिष्ट शिक्षाविद्, लेखक और पत्रकार प्रो. (डाॅ) दिलीप कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सार्थक बदलाव का वाहक बताते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से हम देश के सामने जो अनेक चुनौती हैं, उनका सामना कर सकते हैं।

महाविद्यालय के प्राचार्य एवं डीन प्रो. डाॅ. नीरज कर्ण सिंह ने स्वभाषा के प्रति आदर भाव प्रकट करने वाली भारतेंदु हरिश्चंद की कविता से कार्यक्रम की शुरुआत की और वेबिनार के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि भाषा केवल संवाद प्रेषण का माध्यम नहीं है, वह संस्कृति की वाहिका भी है। संस्कृति का उद्गम भी उसी भाषा में होता है जो उस देश में रची-बसी हो और वहां के संस्कारों तथा लोकजीवन को अभिव्यक्ति प्रदान करती.

विचार आयोजन के तकनीकी सत्र की अध्यक्षता सहायक प्राध्यापक डाॅ. गुंजन शर्मा ने किया वहीं वक्ता के तौर पर प्रो. अशोक त्यागी, प्राध्यापक बीनम यादव ने अपने विचार व्यक्त किये। लेकचरर प्रीति सिंह के सत्र संचालन किया। समापन सत्र में मुख्य अतिथि राज्य उच्च शिक्षा परिषद हरियाणा के अध्यक्ष प्रो. बीके कुटियाला रहे वहीं विशेष वक्ता के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय में भाषा विज्ञान के एसोसियट प्रोफेसर डा. रवि प्रकाश टेकचंदानी, वक्ता के तौर पर सुभारती पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय के सहायक प्राध्यापक डाॅ. मुदस्सिर सुल्तान रहे।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि के तौर पर प्रो. बीके कुटियाला ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को उन्होंने युगांतरकारी कहा। दिल्ली विश्वविद्यालय में भाषा विज्ञान के एसोसियट प्रोफेसर डा. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने कहा कि भारतीय भाषाओं की विकास गति को कोई भी नहीं रोक सकता। डा. मुदस्सिर सुल्तान ने भारतीय भाषाओं के विकास के लिए जनभागीदारी तथा जागरूकता पर बल दिया।

वेबिनार का समापन करते हुए प्रो. (डा.) नीरज कर्ण सिंह ने सभी सहभागियों का आभार प्रकट किया और आशा प्रकट की कि इस प्रकार का विचार मंथन देश को यह सार्थक दिशा दे सकता है। वेबिनार का सह संचालन बीनम यादव ने किया। इस वेबिनार में 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया तथा इसे 10 हजार से अधिक लोगों ने वर्चुअल प्लेटफार्म पर देखा।

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