हेड कांस्टेबल मनोज चौधरी का शव पूर्वजों के घाट पर रूकने से लोग अचंभित
परिजनों को अपने के जाने का दुख, मगर शव का अंतिम संस्कार कर पाने का संतोष
न्यूज डेस्क। उत्तराखंड के चमोली में हुए हादसे के बाद से लापता पुलिसकर्मी का शव घटनास्थल से 110 किलोमीटर दूर पूर्वजों के घाट पर मिला। इतना लंबा रास्ता तय करने के बाद शव का पूर्वजों के घाट पर जाकर रूकने को लेकर लोग अचंभित हैैं। वहीं हादसे में अपने को खोने का दर्द तो परिजनों को पीड़ा पहुंचा रहा था मगर उनका शव पूर्वजों के घाट पर मिलने से उन्हें अंतिम संस्कार कर पाने का संतोष भी है।
उत्तराखंड स्थित चमोली में आई आपदा में अनेक लोग लापता हैं। इनमे उत्तराखंड पुलिस में बतौैर हेड कांस्टेबल कार्यरत 42 वर्षीय मनोज चौधरी भी लापता थे। 20 साल पहले यूपी पुलिस में शामिल मनोज चौधरी ने उत्तराखंड राज्य बन जाने के बाद अपनी इच्छा से वहां नियुक्ति प्राप्त की थी।
मनोज चौधरी की ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट पर तैनाती बाढ़ से केवल 15 दिन पहले की गयी थी। चमोली आपदा में गुम हो जाने के बाद से मनोज चौधरी की तलाश जारी थी। उनके भाई अनिल पुलिस से मिली सूचना के बाद घटनास्थल पर पहुंचे तो मनोज चौधरी के सहयोगियों ने बताया कि बाढ़ का पानी उन्हें बहा कर ले गया।
निराश होकर अनिल वापस लौट रहे थे कि उन्हें कर्णप्रयाग में मिले चार शवों की तस्वीरें मिलीं जिनमेें से एक फोटो उनके भाई मनोज चौधरी की थी। अनिल चौधरी ने बताया कि उनके भाई मनोज चौधरी का शव घटनास्थल से 110 किलोमीटर दूर कर्णप्रयाग स्थित अलकनंदा और पिंडार नदियों के घाट पर मिला है।
गौरतलब है कि ऋषि गंगा नदी धौली गंगा से मिलने के बाद आगे जाकर अलकनंदा में गिरती है अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अनिल चौधरी ने बताया कि मनोज चौधरी का शव जिस घाट पर मिला है वह उनके पूर्वजों का घाट है। यह घाट उनके पूर्वजों के गांव कनौडी के नजदीक है। अनिल को अपने भाई को खोने का दुख तो है लेकिन उनका शव पूर्वजों के घाट पर मिलना वह ऊपर वाले की कृपा मान रहे हैं। वहीं भाई के शव का अंतिम संस्कार रीति-रिवाज से कर पाने का संतोष भी है। भीषण आपदा में मारे गए हेड कान्स्टेबल मनोज चौधरी और कांस्टेबल बलवीर सिंह गड़िया का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया है।

