टोक्यो। युद्ध हमेशा साजिशों और सनक नीतियों का अंजाम होते हैं। जिसमें बेगुनाहों की लाशें बिछती हैं। बात हो रही है जापान के नागासाकी शहर की। जो आज से 77 वर्ष पहले अमेरिका के दूसरे परमाणु बम का शिकार हुआ था। शहर की विडंबना यह रही कि यह अमेरिकी बमबारी वाले शहरों की लिस्ट में नीचे था। लेकिन साजिश के चलते दूसरे नंबर पर पहुंच गया था। तत्कालीन अमेरिकी मंत्री नहीं चाहते थे कि क्योटो शहर पर परमाणु बम गिरे। दूसरे विश्व युद्ध में 1945 में अमेरिका ने जापान के हौसले पस्त करने के लिए पहले छह अगस्त को प्रमुख शहर हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था। इसके तीन दिन बाद यानी आज के दिन नौ अगस्त 1945 को नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया था। परमाणु बम में दोनों शहर बर्बाद हो गए थे और लाखों लोगों की मौत हो गई थी। 4000 डिग्री की गर्मी व आसमान से काली बारिश ने मौत का ऐसा तांडव मचाया उसे देखे पूरी दुनिया सहम गई। उसके बाद से पूरी दुनिया में हिरोशिमा व नागासाकी दिवस मनाकर परमाणु हथियारों का विरोध करने की परंपरा है। हालांकि, दुनिया के परमाणु जखीरे में हर वर्ष बढ़ोतरी हो रही है।
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77 वर्ष पहले आज के दिन अमेरिकी वायुसेना के .29 बमवर्षक विमान जापान के कोकुरा शहर पर परमाणु बम गिराने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन उस दिन बादलों ने इस शहर को बचा लिया। बादल और आसमान पर छाए विमानों के धुएं से इन विमानों को कोकुरा दिखाई नहीं दिया। इस कारण उन्हें बम गिराने का ठिकाना बदल दिया। अमेरिकी बमवर्षक ने सूची के अगले शहर क्योटो की बजाए नागासाकी का रुख कर लिया और सुबह 11 बजकर दो मिनट पर नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिरा दिया। हिरोशिमा के बाद कोकुरा और फिर क्योटो पर परमाणु बम गिराने की तैयारी थी। लेकिन तत्कालीन अमेरिकी युद्धमंत्री हेनरी एम स्टिमसन के प्रयास से क्योटो को बच गया। जबकि नागासाकी पर बम गिरवा दिया। माना जाता है कि 1920 में स्टिमसन ने क्योटो में अपना हनीमून मनाया था। वह चाहते थे कि उनकी अमिट यादों के शहर को तबाही से बचाया जाना चाहिए। इसलिए उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन को क्योटो को बचाने के लिए कहा। र्ट्रूमैन ने बात मान ली थी। क्योटो का नाम हमले की निचली पंक्ति में रख दिया गया।

