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देहरादून पर ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) की काली छाया


देहरादून पर ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) की काली छाया

राजधानी देहरादन में तीन मरीजों में मिला ब्लैक फंगस इंफेक्शन

देहरादून। कोरोना संक्रमण से जुझ रहे देहरादूून पर अब ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) इंफेक्शन की काली छाया भी मंडराने लगी है। जिले में तीन मरीजों में ब्लैक फंगस इंफेक्शन की पुष्टि हो जाने के बाद स्वास्थ विभाग भी अलट हो गया है। कोरोना और अन्य गंभीर रोगों से संक्रमित या हाल ही में रोगमुक्त हुए मरीजों के लिये ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) इंफेक्शन काफी खतरनाक है। ऐसे मरीजों को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादूून कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित है। पूरे प्रदेश में मिलने वाले कोरोना संक्रमितों में से अधिकतर देहरादून जिले के होते हैं। वहीं जिले में होने वाली मौतों का आंकड़ा भी प्रदेश में सबसे अधिक है। कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार के बीच अब ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) इंफेक्शन का खतरा देहरादून पर मंडरा रहा है। शहर के निजी अस्पतालों में भर्ती तीन मरीजों में ब्लैक फंगस इंफेक्शन की पुष्टि होने से स्वास्थ विभाग की परेशानियां बढ़ गयी हैं। कोरोना संक्रमण की रोकथाम में अपने सारे संसाधनों को झोंक देने वाले स्वास्थ विभाग के लिये ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) इंफेक्शन का सामना करना बेहद मुश्किल होगा।

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हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) इंफेक्शन कोई नयी बीमारी नहीं है। लेकिन कोरोना और अन्य गंभीर रोगों से ग्रसित लोगों में प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने के कारण ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) इंफेक्शन हावी हो रहा है। खासकर कोरोना संक्रमित व्यक्ति को दी जाने वाले स्टेरायॅड मरीज का शुगर लेवल बढ़ा देते हैं जिसके बाद उनके ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) इंफेक्शन से प्रभावित होने का खतरा अधिक हो जाता है। ऐसे में स्टेरायॅड का सेवन कम से कम करने और शुगर लेवल को नियंत्रित रखकर ब्लैक फंगस इंफेक्शन के खतरे को कम किया जा सकता है। डायबिटीज के रोगियोें को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) इंफेक्शन मरीजों की आंखोें की रोेशनी छीनने के अलावा उनके दिमाग, फेेफड़े या त्वचा को भी प्रभावित कर सकता है। ब्लैक फंगस ( Black Fungus ) इंफेक्शन से प्रभावित व्यक्ति को दांत में दर्द होना, दांत का टूटना, जबड़ों में दर्द रहना, आंखें लाल और पलकों पर सूजन दिखना, आंखों में दर्द के साथ धुंधला या दोहरा दिखाई देना, सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी होना, नाक के पास लालिमा हो जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। समय से उपचार न होने पर मरीज के जबड़े और नाक की हड्डी गलने के मामले भी सामने आ रहे हैं।

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