अब ”डेडबॉडी कंट्रोल मैनेजमेंट” में जुटी सरकारें …

आर्टिकल/इंटरव्यूअब ”डेडबॉडी कंट्रोल मैनेजमेंट” में जुटी सरकारें …

Date:


अब ”डेडबॉडी कंट्रोल मैनेजमेंट” में जुटी सरकारें …

अजय श्रीवास्तव
लखनऊ। अब ऑक्सीजन को लेकर मारामारी कम हो जाने और श्मशान घाटों पर पहले के मुकाबले कम शवों के पहुंचने की खबरें सुनकर हम पूरी तरह राहत की सांस भी न ले सके थे कि यूपी-बिहार की नदियों में दर्जनों लावारिस शवों के बहने की सिलसिलेवार खबरों ने झकझोर दिया। मौतें इस कदर हो रहीं हैं कि लोग संवेदनाशून्य हो चुके हैं। लोग पुल से ही नदियों में लाशें फेंककर भाग रहे हैं। बगैर परम्परागत क्रिया-कर्म के बालू में ही गाड़ रहे हैं डेडबॉडी को। अब इस पर क्रोध प्रकट करें, दुख प्रकट करें या हंसे? पहले ‘कोरोना कंट्रोल मैनेजमेंट’ में जुटी सरकार अब ‘डेडबॉडी कंट्रोल मैनेजमेंट’ में जुट गई है। जहां-जहां लाशें मिलने की घटनाओं का संज्ञान लेतें हुए राष्ट्रीय मानावाधिकार की नोटिस के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आला अधिकारियों को इस बावत सख्त निर्देश देने पड़े हैं।

गृह विभाग को भेजे गये मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसडीआरएफ और पीएसी की जल पुलिस को नदियों में पेट्रोलिंग करने को कह दिया गया है। साथ ही गांवों और शहरों में कमेटी बनाने के निर्देश भी दे दिये गये। इस कवायद के पीछे मंशा शवों का परम्परागत ढंग से अंतिम संस्कार कराने के साथ-साथ नदियों में शवों के प्रवाहित करने से रोकने की है। जरूरत पडऩे पर शव प्रवाहित करने पर जुर्माना लगेगा। गौर हो इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा नदी में बहती लावारिस लाशों के संबंध में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और दोनों राज्यों को नोटिस जारी किया। कहा कि ऐसा लगता है कि प्रशासनिक अधिकारी जनता को जागरूक करने और गंगा नदी में अधजली या बिना जली लाशों को बहाने से रोकने में असफल हुए हैं।

बहरहाल, व्यवहारिक बात की जाय तो यह लाशें नहीं हैं बल्कि एक आंकड़ा भी हैं जो मुमकिन है सरकारी रिकार्ड से गायब हो? दो राज्यों के प्रशासनों के बीच इस बात को लेकर विवाद है कि लाशें उनके यहां से नहीं बहाई गई हैं, कहीं और से बहाई गई हैं? क्या पता कोई आर्थिक तंगी की वजह से अंतिम संस्कार न कर पाया हो? यह भी मुमकिन है कि इतनी मौत हो गई हो कि जलाने की जगह और सामग्री कम पड़ गई हो और लोगों ने लाशों को बहा दिया हो? …और किसी को मौजूदा हालात की बेबसी ने मजबूर कर दिया हो?

यूपी में उन्नाव पुल तो सीमा से सटे बिहार के सारण जिले के मांझी प्रखंड में एक पुल है जिसका नाम है जयप्रभा सेतु। यहां देखा गया है कि लोग कोविड संक्रमित शवों को नदी में फेंक रहे हैं। आए दिन एंबुलेंस से यहां शवों को लाया जाता है और फेंक दिया जाता रहा है। स्थानीय लोगों ने कहा कि दोनों राज्यों की तरफ से लोग ऐसा कर रहे हैं। पुल के नीचे लाशों को फेंक कर भाग जाते हैं।

इतिहास और हिन्दी साहित्य दोनों की स्टूडेंट होने के नाते मैं दावे से कह सकता हूं कि, 1918 के स्पेनिश फ्लू के समय यही हुआ था। देश में इतने लोग मरे थे कि लाशों से नदियां भर गई थीं। क्या 102 साल बाद हम उसी हालात में पहुंच गए हैं? क्या इन शवों को मरने वालों में गिना जा रहा है? मशहूर कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने उस दौर को बयां करते हुए लिखा है, मैं दालमऊ में गंगा के तट पर खड़ा था। जहां तक नजर जाती थी गंगा के पानी में इंसानी लाशें ही लाशें दिखाई देती थीं। कोई कवि या लेखक क्या आज के हालातों में भी यूं गंगा किनारे खड़ा होकर हकीकत बयां करेगा?

वैसे मौजूदा स्थिति यह है कि, बिहार और यूपी के बीच ठीक वैसा ही विवाद पैदा होता जा रहा है जैसे दो थानों की पुलिस के बीच किसी लावारिस शव को एक दूसरे के थानाक्षेत्र में बताने में होता है। ताकि एक थाने के पुलिस रिकॉर्ड में दूसरे के मुकाबले ज्यादा अपराध दर्ज न हों। यूपी की स्थिति तो यह है कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा नदी में उतराती हुई लाशों के मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। गंगा नदी के अलग-अलग हिस्सों में लाशें मिलीं। इन लाशों के मिलने से स्थानीय लोगों के साथ नाविक भी परेशान हैं। नाविकों का दावा है कि गंगा उस पार से कोरोना संक्रमित शवों को जल प्रवाहित किया जा रहा है। इस बीच बिहार बॉर्डर पर बक्सर पुलिस ने गंगा नदी में महाजाल लगाया है, ताकि यूपी से आने वाली लाशें यूपी में ही फंसी रहें।

हकीकत तो यह है कि, दोनों राज्यों की पुलिस सड़कों पर भले-चंगे नागरिकों से कोरोना लॉकडाऊन का पालन कराते-कराते अब मुर्दो की निगरानी के लिए नदी में उतर चुकी है। वाराणसी में गंगा नदीं में बहते शवों पर गाजीपुर के डीएम ने कहा कि शवों के अंतिम संस्कार में निर्धन और असहायों की आर्थिक मदद होगी, लेकिन शवों का जल विसर्जन अब नहीं होगा। नदी के किनारों पर पुलिस की पैनी नजर रख रही है। इसकी बावत बकायदा श्मशान घाटों पर पुलिस टीम ने मुनादी भी की। यहां सोचने की बात यह है कि, जो लोग अपनों के शवों का बगैर रीति-रिवाज के अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं, उन पर कार्रवाई क्या होगी?

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related