आज जब कोरोना वायरस के संकट से पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है और ऐसे में सोमवार को जब कैरेबियाई टीम ने इंग्लैैंड के खिलाफ पहला टेस्ट मैच जीता, तो उनका सेलिब्रेशन का अंदाज देखकर दुनिया के हर क्रिकेट फैंस के चेहरे पर मुस्कान आ गई. ऐसा इसलिए क्योंकि वेस्टइंडीज के साथ ज्यादातर खिलाडिय़ों और फैंस का एक भावनात्मक सा लगाव रहता है, जिसे आसानी से बयां नहीं किया जा सकता. नई पीढ़ी या सिर्फ सोशल मीडिया के दौर में क्रिकेट को फॉलो करने वालों के लिए यह समझना थोड़ा मुश्किल हो कि आखिर क्यों हर न्यूट्रल फैन कैरेबियाई टीम की जीत पर काफी खुश होता है?
गौरवशाली इतिहास
सबसे पहली वजह है वेस्टइंडीज का गौरवशाली इतिहास. पूरे क्रिकेट इतिहास में टेस्ट क्रिकेट में ऐसा रुतबा किसी भी टीम का नहीं रहा है. जी हां, लगातार 16 टेस्ट मैच दो मौकों पर जीतने वाली आधुनिक ऑस्ट्रेलियाई टीमों का भी नहीं. 1970 के मध्य से लेकर 1990 के मध्य तक (करीब दो दशक) कैरेबियाई टीम के खिलाफ टेस्ट या सीरीज ड्रॉ करना ही एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी. आज भी फैंस को कभी-कभी उम्मीद जग जाती है कि शायद विवियन रिचड्र्स और मैल्कम मार्शल वाला दौर फिर से वापस लौट आए.
विनम्र और खुशमिजाज
विनम्रता और खुशमिजाज स्वभाव ने हमेशा से ही कैरेबियाई टीमों को दुनिया की हर चैंपियन टीमों से अलग रखा. जिस टीम में एक से बढ़कर एक खूंखार गेंदबाज और धाकड़ बल्लेबाज हो, वह टीम कभी भी ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड जैसे मुल्कों की तरह कभी अंहकारी तरीके से पेश नहीं आई. मैच के बाद जीत का जश्न मनाना और बेपरवाह होकर खुश होने की अदा ने वेस्टइंडीज की टीम को हमेशा क्रिकेट फैंस के दिल में एक ख़ास जगह दी है.
उदारता
उदारता एक ऐसा पहलू रहा है, जिसकी चर्चा क्रिकेट एक्सपट्र्स बहुत कम करते हैैं. कुछ साल पहले वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान क्लाइव लॉयड ने हर किसी का ध्यान खींचा था. पिछले 2 दशक में वेस्टइंडीज की टीम ने टेस्ट क्रिकेट में ज्यादातर संघर्ष ही किया है. ऐसे में उनके खिलाफ खेलने के लिए भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे बड़े मुल्क बहुत उत्साहित नहीं होते थे. लॉयड ने कहा कि जिस दौर में उनकी टीम का दबदबा होता था उस समय ये तीनों मुल्क कैरेबियाई टीमों के साथ लगातार मैच आयोजित करते थे और पैसे कमाते थे. लॉयड के इस तर्क की कोई काट नहीं है कि अपने महापराक्रमी वाले दौर में भी दूसरी टीमों को उन्होंने कभी ओछी नजर से नहीं देखा.
क्रिकेट का हित पहले
कैरेबियाई टीम खुद के लिए नहीं क्रिकेट के हित के लिए अक्सर सोचती है. इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथर्टन ने लंदन के द टाइम्स अखबार में अपने कॉलम में खास तौर पर वेस्टइंडीज की मौजूदा टीम की जमकर तारीफ की थी. एथर्टन का कहना था कि जहां इंग्लैंड में कोरोना वायरस को लेकर संकट है वहीं कैरेबियाई देश में शांति. इसके बावजूद वेस्टइंडीज के खिलाडियों ने जोखिम लेते हुए टेस्ट सीरीज खेलने के लिए तैयार हो गए हैं. इसके लिए उन्हें न तो अलग से कोई ज्यादा पैसा दिया गया और न ही उनकेआगे काफी गुजारिश करने पड़ी.
विदेशी जमीं पर धाकड़
नई सदी में ये पहला मौका है जब इंग्लैंड के खिलाफ इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज में कैरेबियाई टीम ने 1-0 की बढ़त ली है. अब दुनिया भर के क्रिकेट फैन्स की चाहत यही होगी कि वेस्टइंडीज इस मुल्क में टेस्ट सीरीज भी जीते. आखिर किसी भी विदेशी टीम को उन्हीं के घर में हर टेस्ट (5 मैचों की सीरीज) में रौंदने का इकलौता कमाल भी वेस्टइंडीज के नाम ही है. 1984 में पराक्रमी कैरेबियाई टीम ने मेजबान इंग्लैंड को 5-0 से हराया था. ऐसा 2022 में मुमकिन तो नहीं दिखता है, लेकिन कौन जाने इंग्लैंड के खिलाफ ये चमत्कार भी मौजूदा टीम कर दिखाए.

