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Chhattisgarh Naxalite attack: काश्मीर से लेकर नक्सल बेल्ट तक IED विस्फोट, एंबुश का इस्तेमाल

Naxalite attack

नई दिल्ली। आज छत्तीसगढ़ में दांतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में दस से अधिक जवान शहीद हो गए। नक्सली और आतंकवादी अब जवानों से आमने सामने की मुठभेड़ के बजाय आईईडी का उपयोग कर रहे है। ब्लास्ट मामलों की जांच कर चुके अनुभवी बैलिस्टिक एक्सपर्ट की माने तो नौसिखिये आतंकी और नक्सली आईईडी और टिफिन बम का इस्तेमाल कर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में सक्रिय है। ये राष्ट्र विरोधी आतंकी पंजाब, कश्मीर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों या उत्तर पूर्व राज्यों में सक्रिय है। ये लोग अब सीधे तौर पर जवानों के साथ टकराने से बच रहे हैं।

नक्सलियों के सामने नई भर्ती का संकट

नक्सलियों के सामने नई भर्ती का संकट खड़ा हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल तक कह चुके हैं कि अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अंतिम लड़ाई है। माओवादी गतिविधियां, आखिरी चरण में हैं। इस वजह से नक्सली बौखलाहट में हैं। वे किसी भी तरह से अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं।

पिछले कुछ समय से नक्सली दस्ते आमने-सामने की लड़ाई से बच रहे हैं। उन्हें मालूम है कि देश के जवानों के साथ सीधी लड़ाई में वे बच नहीं सकेंगे। इसी वजह से नक्सली आईईडी ब्लास्ट कर रहे हैं। इसे किसी भी जगह पर दबा दिया जाता है। कोई भी दूर बैठा व्यक्ति इसे संचालित कर सकता है। CRPF द्वारा गत वर्षों में हजारों आईईडी बम बरामद किए गए हैं।

IED विस्फोट तकनीक का इस्तेमाल

देश में आईईडी मामलों की जांच कर चुके अनुभवी बैलिस्टिक एक्सपर्ट कहते हैं कि आजकल नौसिखिये आतंकी और नक्सली आईईडी का इस्तेमाल करने लगे हैं। अगर कहीं पर एंबुश (घात लगाकर हमला करना) होता है, तो भी उसमें विस्फोटकों का ही अधिक इस्तेमाल होता है। सीधी मुठभेड़ में उन्हें सुरक्षा बलों के हाथों भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके चलते अब माओवादी संगठन, आईईडी विस्फोट तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भारी संख्या में ऐसे विस्फोटक तैयार कराए जा रहे हैं।

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