कोरोना रोगियों में कार्डियक अरेस्ट का दस गुना ज्यादा खतरा

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कोरोना रोगियों में कार्डियक अरेस्ट का दस गुना ज्यादा खतरा

कोरोना वायरस स्वास्थ्य संबंधी दूसरी कई गंभीर समस्याओं का भी कारण बन रहा है. अब एक नए अध्ययन में पाया गया है कि आइसीयू में भर्ती होने वाले गंभीर कोरोना पीडि़तों में दिल की धड़कन संबंधी विकारों या कार्डिक अरेस्ट का दस गुना ज्यादा खतरा हो सकता है. इस अध्ययन से गंभीर रोगियों को इस तरह के जोखिम से बचाने में मदद मिल सकती है.
अमेरिका की पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, कोरोना के कुछ रोगियों को कार्डिक अरेस्ट और अनियमित धड़कन की समस्या से जूझना पड़ा. ऐसा कोरोना के गंभीर संक्रमण के कारण हो सकता है. यह निष्कर्ष अस्पताल में भर्ती किए गए करीब 700 कोरोना मरीजों में कार्डिक अरेस्ट और अनियमित धड़कन के खतरे के आकलन के आधार पर निकाला गया है.

अनियमित धड़कन की मिली जानकारी
हार्ट रिदम पत्रिका में प्रकाशित हुए निष्कर्ष और पूर्व में किए गए अध्ययनों के बीच अंतर पाया गया है. पूर्व के अध्ययनों में कोरोना रोगियों में अनियमित धड़कन के उच्च स्तर पर मामले मिलने का दावा किया गया था. शोधकर्ताओं ने कहा कि हमारे नतीजों से दिल की अनियमित धड़कन जैसी समस्याओं में कोरोना वायरस की भूमिका के बारे में ज्यादा स्पष्ट जानकारी मुहैया होती है. पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ शोधकर्ता रजत देव ने कहा, ‘यह समझना हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि यह संक्रमण दिल की धड़कन समेत शरीर के विभिन्न अंगों को किस तरह प्रभावित करता है.Ó हाल के अध्ययनों से यह जाहिर हो चुका है कि इस खतरनाक वायरस के चलते डायबिटीज और हृदय रोग समेत तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) संबंधी कई गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं.

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