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स्पीकर पद पर अड़ गयी TDP, क्या करेंगे मोदी-शाह

आर्टिकल/इंटरव्यूस्पीकर पद पर अड़ गयी TDP, क्या करेंगे मोदी-शाह

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अमित बिश्नोई
तमाम राजनीतिक चर्चाओं और अफवाहों के बावजूद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बन गयी, मोदी जी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन चुके हैं, मंत्रिपरिषद का गठन हो चूका है, मंत्री परिषद् के गठन के बाद वो एक विदेश दौरा भी कर आये हैं. चर्चा थी कि मंत्री परिषद् के गठन के दौरान मोदी जी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले दो सहयोगियों TDP और JDU द्वारा कुछ ऐसी डिमांड का सामना करना पड़ेगा जिनको पूरा करने में प्रधानमंत्री मोदी को समस्या होगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और मोदी जी ने अपनी मनचाही कैबिनेट का निर्माण कर लिया लेकिन अब जो खबर आ रही है वो NDA सरकार के लिए समस्या भी है और खतरा भी. मंत्रिमंडल के गठन के बाद ख़ामोशी बरतने वाले सहयोगी दल TDP ने स्पीकर पद की डिमांड करके प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा को बेचैन कर दिया है.

बता दें कि सरकार बनने के बाद लोकसभा स्पीकर का चुनाव सबसे बड़ा फैसला होता है क्योंकि पिछले दस वर्षों में राजनीति जिस तरह बदली है उससे स्पीकर का महत्त्व बहुत बढ़ गया है. सत्तारूढ़ दल जिस तरह लोकसभा अध्यक्ष की मदद से सहयोगी पार्टियों और विपक्ष पर अपना कंट्रोल रखता है ये किसी से छिपा नहीं है, इस बात को तेदेपा अच्छी तरह समझती है और इसीलिए वो स्पीकर पद को लेकर अड़ियल रुख अपनाये हुए है. उसने साफ़ कह दिया है स्पीकर के पद पर तेदेपा का ही सांसद होगा। तेदेपा की इस शर्त से मोदी सरकार के लिए समस्या खड़ी हो गयी है, प्रधानमंत्री मोदी ने जदयू को तो इस मामले में अपने पक्ष में कर लिया है लेकिन तेदेपा किसी तरह राज़ी नहीं हो रही है।

दरअसल चंद्रबाबू नायुडु ने भाजपा को समर्थन भले ही दे दिया है लेकिन वो मोदी और शाह की कार्यशैली को बखूबी जानते हैं , बल्कि भुक्तभोगी भी हैं, वो जानते हैं कि आज भले ही वो मोदी और शाह की मजबूरी बने हुए हैं लेकिन जल्द ही वो इसबात की पूरी कोशिश करेंगे कि अपने पैरों पर खड़े हो जांय, यानि अपने दम पर 272 का आंकड़ा पार कर जांय। तेदेपा प्रमुख ये भी जानते हैं कि भाजपा के लिए ये जादुई आंकड़ा पार करना मुश्किल ज़रूर है लेकिन असंभव बिलकुल भी नहीं। चंद्रबाबू नायुडु ये भी जानते हैं ये संख्या बल भाजपा को कहीं और से नहीं बल्कि तेदेपा और जदयू से ही मिल सकती है.

चंद्रबाबू नायुडु को ये भी अच्छी तरह पता है कि इस बारे में विपक्ष बहुत चौकन्ना हो गया है इसलिए भाजपा को अपना संख्या बल जुटाने में वहां से कोई मदद नहीं मिलेगी बल्कि इन दिनों देश का जो राजनीतिक माहौल चल रहा उसके हिसाब से तो रिवर्स ऑपरेशन लोटस का खतरा ज़्यादा पैदा हो गया है, ऐसे में मोदी शाह की नज़र अपने सहयोगियों पर ही होगी। वैसे भी भाजपा का इतिहास रहा है सहयोगियों की पार्टियों को तोड़ने का, उन्हें कमज़ोर करने का, ताज़ा उदाहरण नितीश कुमार के रूप में है, किस तरह एक समय प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले नितीश कुमार आज खुले मंच पर मोदी जी के पैर छू रहे हैं जो आज बिहार में एक राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है. ऐसे में तेदेपा नहीं चाहती कि उसकी पार्टी में कोई अनहोनी हो. यही वजह है कि वो स्पीकर के पद के लिए पूरी तरह अड़ी हुई है, चंद्रबाबू नायुडु अच्छी तरह जानते हैं सांसदों की तोड़फोड़ के समय स्पीकर की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो जाती है, पिछले पांच सालों में स्पीकर के सहारे सरकार ने विपक्ष पर किस तरह के हमले किये, सौ से ज़्यादा की संख्या में विपक्ष के सांसदों को निलंबित किया, किस तरह करवाई से विपक्ष के नेताओं के बयानों हटाया गया, किस तरह राहुल गाँधी की सदस्यता और फिर उनका घर छीनने में तेज़ी दिखाई गयी. कहते हैं न कि दूध का जला छाछ भी फूंक फूंककर पीता है, वही काम चंद्रबाबू नायुडु कर रहे हैं. अपने वजूद और अहमियत को बरक़रार रखने और अपनी पार्टी को किसी भी अनहोनी से बचाने के लिए उन्हें स्पीकर का पद चाहिए, अब देखना है कि सरकार में सहयोगियों के बीच छिड़ी इस जंग में बाज़ी कौन मारता है.

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