काबुल। क्रूर तालिबान कूटनीतिक भी हो गया है। तालिबान का एक ताजा बयान वैसे तो भारत के लिए है इस बयान से पूरी दुनिया भौचक है। संभवत भारत भी तालिबानी प्रतिक्रिया से दिग्भ्रमित होगा? असल में अफगानिस्तान में परसंहर कर रहे तालिबान ने इंडिया से दोस्ती के संकेत दिए हैं। तालिबान के मुताबिक, अफगानिस्तान में इंडिया समेत किसी भी देश की आर्थिक परियोजनाओं को कोई खतरा नहीं है, बशर्ते इसके लिए भारत अशरफ गनी सरकार द्वारा की जा रही गोलीबारी का समर्थन करना बंद कर दे।
बहरहाल, तालिबानी वार्ताकार सुहैल शाहीन ने रॉयटर्स को जानकारी दी कि, हम अफगानिस्तान के ग्रामीण इलाकों पर नियंत्रण हासिल कर वहां इस्लामी शरिया लागू करने की अपनी रणनीति बनाये रखे हुए है। एक्सपट्र्स के मुताबिक, जुलाई से तालिबान की रणनीति में बदलाव दिख रहा है। प्रमुख उदाहरण शहरी सीमा का उल्लंघन है। संघर्ष क्षेत्र विशेष तक नहीं बल्कि व्यापक होता जा रहा है। हालांकि अफगान सेना के समथ्र्रन में लाखें लोग तालिबान के खिलाफ सामने आ रहे हैं।
तालिबान ने ऐसा पहली बार किया है जबकि, कथित तौर पर भारत से समझौते की पेशकश की है। दी ट्रिब्यून की एक खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, बताया है कि तालिबान डेलीगेशन ईरान, रूस और चीन जैसे देशों से बातचीत कर रहा है और कुछ हद तक इसी तरह की पेशकश रख रहा है। हालांकि, भारत को लेकर यह बयान तालिबान के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की तुलना में कम रैंकिंग वाले मेम्बर का है। बावजूद इसके यह यह तालिबानी प्रतिक्रिया अहम है।
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इस बीच अमरीका तालिबान पर हवाई जवाबी कार्रवाई और तेज कर रहा है। जवाब में तालिबान प्रांतीय शहरों में हमले बढ़ा रहा है। तालिबान कमांडर से हवाले से रॉयटर्स ने बताया है कि तालिबान शीघ्र ही और शहरों पर कब्जे को तैयार हैं। विशेषज्ञों का तक्र है कि कांधार और हेरात जैसे शहरों पर तालिबान का कब्जा अफगान गवर्मेंट के लिए शॉक है। तालिबान के लिए काबुल की राहें तब आसान हो सकती हैं जबकि, तालिबान कांधार और हेरात जैसे शहरों को अपने पर कब्जे में कर लेता है।

