महाराष्ट्र में राजनीतिक उठापटक का मामला आज सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया जहां एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बागी गुट की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने उन्हें एक बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्यता नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें 14 दिन का नोटिस दिया है. बता दें कि बागी विधायकों को डिप्टी स्पीकर ने अयोग्यता नोटिस भेजकर उन्हें 27 जुलाई की शाम तक व्यक्तिगत तौर पर या वकील के द्वारा पेश होकर जवाब देने को कहा था.
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सुप्रीम कोर्ट ने इसके अलावा केंद्र सरकार, डिप्टी स्पीकर, शिवसेना विधायक दल के नेता अजय चौधरी, पार्टी के चीफ व्हिप सुरेश प्रभु समेत सभी पक्षों को नोटिस भी भेजा है और पांच दिन में जवाब देने को कहा है, मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को तय हुई है. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा है कि फैसले तक कोई भी फ्लोर टेस्ट नहीं होगा, साथ ही इस पूरे मामले में स्टेटस को मेंटेन रखने को कहा है. कोर्ट ने सभी विधायकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए हैं.
जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की ओर से कहा गया कि डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल की भूमिका खुद संदिग्ध है, ऐसे में वह उनको अयोग्य ठहराने का नोटिस जारी कैसे कर सकते हैं? वहीँ महाराष्ट्र सरकार का पक्ष रखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बागी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले हाईकोर्ट जाना चाहिए था.
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सुप्रीम कोर्ट ने मनु सिंघवी की दलीलों के बाद पूछा कि क्या जिस स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया हो वो अयोग्यता की कार्रवाई शुरू कर सकता ? शीर्ष अदालत ने पूछा कि शिंदे गुट ने मेल के जरिये विधानसभा उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था जिसपर विधायकों के हस्ताक्षर थे. इसपर डिप्टी स्पीकर के वकील राजीन धवन ने कहा कि हां नोटिस आया था, उन्होंने कहा कि ई-मेल वैरिफाइड नहीं था इसलिए अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था. इसके बाद कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर और विधान सभा दफ्तर को एक एफिडेविट दाखिल करने को कहा.

