न्यूज़ डेस्क – G7 देशों ने एकजुट होकर ईरान के खिलाफ लड़ाई में इस्राइल का समर्थन किया है। सोमवार देर रात जारी बयान में G7 नेताओं ने स्पष्ट कहा कि ईरान ही पश्चिम एशिया में अस्थिरता का मुख्य कारण है। साथ ही उन्होंने इलाके में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्राइल और ईरान के बीच सीधा सैन्य संघर्ष तेज हो चुका है।
क्यों भड़का इस्राइल-ईरान संघर्ष?
- शुक्रवार को इस्राइल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे।
- इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया।
- इस संघर्ष ने पूरे मध्य-पूर्व में तनाव और भय का माहौल पैदा कर दिया है।
- यह तनाव अक्टूबर 2023 से जारी है, जब इस्राइल ने गाजा में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी।
G7 सम्मेलन और ईरान की गूंज
कनाडा में आयोजित G7 सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करना था, जैसे:
- यूक्रेन युद्ध
- वैश्विक व्यापार
- जलवायु परिवर्तन
लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इस्राइल-ईरान संघर्ष ने सम्मेलन को प्रभावित कर दिया।
डोनाल्ड ट्रंप की तीखी चेतावनी
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सम्मेलन में कहा:
“ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करना ही होगा, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।”
- ट्रंप ने बताया कि ईरान को 60 दिन पहले ही समझौते का मौका दिया गया था, लेकिन उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया।
- ट्रंप ने तेहरान खाली करने की चेतावनी सोशल मीडिया पर दी और फिर अचानक सम्मेलन छोड़कर चले गए।
ईरानी परमाणु साइटों पर हमला – क्या कर पाएगा इस्राइल?
- इस्राइल अब तक कई ईरानी परमाणु स्थलों को निशाना बना चुका है।
- लेकिन Fordow यूरेनियम संवर्धन सुविधा अब भी बची हुई है, जो गहरी भूमिगत है।
इसे नष्ट करने के लिए जरूरी है:
- GBU-57 Massive Ordnance Penetrator (MOP)
- यह एक अमेरिकी बंकर-बस्टर बम है, जिसका वजन 14,000 किलोग्राम होता है
- इसे B-2 स्टील्थ बॉम्बर से ही ले जाया जा सकता है
- इस्राइल के पास न तो यह बम है और न ही इसे लॉन्च करने वाला विमान।
क्या आगे बढ़ेगा अमेरिका?
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका इस संघर्ष में सैन्य रूप से शामिल होगा, उन्होंने बस इतना कहा:
“मैं इसके बारे में बात नहीं करना चाहता।”
इस बयान से यह स्पष्ट है कि अमेरिका स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन सीधे हस्तक्षेप की नीति पर अब भी विचार कर रहा है।

