अनाथ को सहारा दीजिये मगर सावधानी के साथ

उत्तर प्रदेशअनाथ को सहारा दीजिये मगर सावधानी के साथ

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अनाथ को सहारा दीजिये मगर सावधानी के साथ

कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों को गोद लेने के लिये ललायित हैं लोग
गोद लेने और देने के लिये कानूनी प्रक्रिया का पालन करना है बेहद जरूरी

सुनील शर्मा

कोरोना के कोप ने अनेक बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अनाथ हो गये बच्चों को सहारा देने के लिये अनेक लोग और संस्थाएं आगे आ रही हैं। ऐसे भी लोग हैं जो संतान के सुख से वंचित रह गये हैं और वह किसी बच्चे को गोद लेकर अपने घर में खुशियां लाना चाहते हैं। निःसंदेह उनके इस प्रयास से किसी अनाथ बच्चे को माता-पिता की गोद मिल जायेगी। किंतु बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया में यदि कानून का पालन न किया गया तो बच्चा लेने और देने वाले, दोनों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। वहीं बच्चा दिलाने के नाम पर साइबर ठगी भी की जा रही है। निःसंतान दंपति को विश्वास में लेकर उनसे पैसे भी ठगे जा रहे हैं। ऐसे में संबंधित विभाग को जानकारी देकर ही बच्चा गोद लेने या देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिये।

हाल ही में गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था-एनजीओ किसी कोरोना पीड़ित बच्चे को गोद लेती है या किसी को दिलाते हैं तो उन्हें ऐसा करने से पहले पुलिस और प्रशासन को सूचना देनी होगी। इसके लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी 9450611460, बाल संरक्षण अधिकारी 7503551845, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, महिला हेल्पलाइन नंबर 181 और पुलिस हेल्पलाइन नंबर 9870395200 पर काॅल कर जानकारी दी जा सकती है। अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो इसे गैरकानूनी माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गौतमबुद्ध नगर पुलिस की ओर से जारी यह चेतावनी कोई नया कानून नहीं है बल्कि कानून न जानने वाले लोगों को यह जानकारी देते हुए सचेत किया गया है। यह प्रक्रिया और नियम-कानून पूरे देश में एक समान हैं। यदि आप देश के किसी भी राज्य में रहते हैं और बच्चा गोद लेना या देना चाहते हैं तो आपको पुलिस-प्रशासन, जिला प्रोबेशन अधिकारी, बाल संरक्षण अधिकारी या चाइल्ड हेल्पलाइन, महिला हेल्पलाइन जो भी आपके राज्य में हो या जिस सरकारी विभाग को अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी दी गयी हो उसको सूचित करना आवश्यक है। यह नियम आम आदमी से लेकर संस्थाओ तक पर लागू होता है।

बच्चे की आस में ठगे न जाये
निःसंतान दंपति की सबसे बड़ी इच्छा अपने घर के आंगन में बच्चे की किलकारियों की आवाज सुनना होती है। इस इच्छा को पूर्ण करने के लिये निःसंतान दंपति हर संभव प्रयास करते हैं। बाद में वह बच्चा गोद लेने के बारे सोचते हैं। कोरोना काल में अनेक बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ जाने की खबरे सुन और पढ कर उनके मन में एक आस पैदा होती है और वह सोशल मीडिया या जानकारो के माध्यम से बच्चा गोद लेने की इच्छा जाहिर करते हैं। जैसे ही साइबर ठगो को यह जानकारी मिलती है वह फर्जी नाम और संस्था का पदाधिकारी बता कर निःसंतान दंपति से संपर्क करते हैं।

इसके बाद शुरू होता है ठगने का सिलसिला। वह बच्चा गोद दिलाने के नाम पर उसके संरक्षक को पैसे देने की बात कर निःसंतान लोगों से रकम देने की डिमांड करते हैं। अधिकतर मामलों में बच्चे को कहीं दूसरे राज्य का बताकर पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर करने की बात कहते हैं। बच्चा पाने की चाहत में दंपति रकम ट्रांसफर कर देते हैं। उसके बाद मोबाइल नंबर बंद हो जाता है और दंपति को खुद के ठगने का अहसास हो जाता है। क्योंकि वह खुद गैरकानूनी कार्य कर रहे थे इसलिये पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं करा पाते हैं।

ऐसे में जरूरी है कि यदि कोई व्यक्ति आपको बच्चा गोद देने की बात कहे तो उस पर विश्वास न करें। उससे संपर्क कर संबंधित विभाग को जानकारी दें और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही बच्चे को गोद लें। पुलिस-प्रशासन और बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी उठाने वाले विभाग की अनदेखी कर कोरोना पीड़ित बच्चों को गोद लेने पर आप किसी मुसीबत में भी फंस सकते हैं।

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