छात्राओं का आरोप- “मेंटल टॉर्चर और फीस के दबाव ने ली अनु की जान”
कमरे की दीवार पर लिखा मिला ‘Hope’, महिला आयोग ने शुरू की जांच
मेरठ स्थित IIMT यूनिवर्सिटी में MBA छात्रा अनु गुप्ता की संदिग्ध मौत ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद कैंपस में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा, जिसके चलते हॉस्टल डायरेक्टर समेत तीन कर्मचारियों को सस्पेंड करना पड़ा। मामले की जांच के लिए 13 सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो यह पता लगाएगी कि छात्रा की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और वजह थी।
अनु गुप्ता यूनिवर्सिटी के सरोजिनी नायडू गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी। उसका शव हॉस्टल परिसर में खून से लथपथ हालत में मिला था। छात्राओं का कहना है कि अनु लंबे समय से मानसिक तनाव में थी और यूनिवर्सिटी की ओर से उस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि अटेंडेंस सर्टिफिकेट जारी करने के बदले उससे 30 हजार रुपए की मांग की जा रही थी।
घटना के बाद एक वीडियो सामने आया, जिसने पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया। वीडियो में छात्रा आशा चौधरी ने आरोप लगाया कि हॉस्टल डायरेक्टर डॉ. लखविंदर सिंह देर रात करीब 2 बजे गर्ल्स हॉस्टल में पहुंचे और छात्राओं से अभद्र व्यवहार किया। विरोध करने पर धमकी भी दी गई। छात्राओं ने सवाल उठाया कि जब अभिभावकों तक की एंट्री नियंत्रित है, तब देर रात पुरुष स्टाफ हॉस्टल में कैसे पहुंच गया।
बढ़ते विरोध और हंगामे के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने डॉ. लखविंदर सिंह के साथ दो महिला वार्डनों सुमन गर्ग और सुमनलता को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया। वहीं छात्र-छात्राओं ने यूनिवर्सिटी गेट पर धरना देकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस बीच उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला भी कैंपस पहुंचीं। उन्होंने हॉस्टल का निरीक्षण किया और छात्राओं से बातचीत की। छात्राओं ने हॉस्टल की खराब सुविधाओं, गंदगी, बदबू, साफ पानी की कमी और बढ़ती फीस को लेकर भी शिकायतें कीं।
सबसे भावुक पल तब सामने आया जब अनु के कमरे की दीवार पर लिखा ‘Hope’ शब्द दिखा। छात्राओं का कहना था कि अनु अपने भविष्य को लेकर सपने देख रही थी, लेकिन लगातार दबाव और कथित उत्पीड़न ने उसे भीतर से तोड़ दिया। अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
