पूत के पाँव पालने में ही पता चल जाते हैं, बेटा जब पिता के नक़्शे कदम पर चलने लगे तो बाप से ज़्यादा ख़ुशी किसे होगी। अर्जुन तेंदुलकर की पहचान अभी सचिन तेंदुलकर के बेटे के रूप में होती है, बहुत से लोग यह भी कहते हैं कि पिता की वजह से अर्जुन को इतनी हाइप मिलती है, सचिन का बेटा होने का उन्हें फायदा मिलता है, कुछ हद तक यह बात सही भी हो सकती है, पिता का एडवांटेज बेटे को तो मिलता ही है मगर साथ में disadvantage भी रहता है क्योंकि तुलना भी उसी पिता से होती है जिसने उस क्षेत्र में नाम कमाया हुआ होता है. लेकिन अर्जुन के मामले में शायद ऐसा नहीं कहा जा सकता, कम से कम तब तो बिलकुल भी नहीं जब उसने भी अपने पिता की तरह रणजी ट्रॉफी की शुरुआत शतक के साथ की हो.
34 साल बाद दोहराया इतिहास
अर्जुन तेंदुलकर ने आज अपना रणजी डेब्यू किया है और अपने पहले मैच की पहली पारी में शतक ठोंककर बता दिया है कि होनहार बिरवान के होत चिकने पात. अर्जुन तेंदुलकर ने रणजी में अपनी शुरुआत के लिए गोवा का चुनाव किया है, उन्होंने गोवा की तरफ से खेलते हुए राजस्थान के खिलाफ वही किया जो उनके पिताश्री ने 34 साल पूर्व गुजरात के खिलाफ किया था यानि सैकड़ा ठोंका था. तो एक तरह से अर्जुन ने इतिहास को दोहराया है. फिलहाल वह 112 रन बनाकर नाबाद हैं, उनका शतक 178 गेंद में आया जिसमें 12 चौके और 2 छक्के शामिल हैं.
युवराज के पिता से ली है कोचिंग
बता दें कि 23 साल के सचिन पुत्र ने पिछले दिनों युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह से कोचिंग ली थी। युवराज को क्रिकेट के गुर योगराज सिंह ने ही सिखाये थे, योगराज सिंह पूर्व टेस्ट क्रिकेटर रह चुके हैं और एक तेज़ गेंदबाज़ थे. अर्जुन तेंदुलकर ने शुरुआत तो बहुत अच्छी की लेकिन टीम इंडिया तक पहुँचने के लिए इतना ही काफी नहीं है उन्हें लगातार कुछ समय तक इसी तरह प्रदर्शन करना होगा। रणजी में एक अच्छी शुरुआत के बाद आने वाले आईपीएल में उनकी असली परीक्षा होगी। उम्मीद हैं कि उन्हें इस बार मुंबई इंडियंस की तरफ ज़्यादा मैच खेलने को मिलेंगे।

