1983 में भारत को पहला विश्व कप जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले टीम के विकेट कीपर बल्लेबाज़ सैयद मुज्तबा हुसैन किरमानी का दशकों बाद आखिर दर्द छलक ही पड़ा, उन्हें शिकायत है कि उनके योगदान का कोई ज़िक्र ही नहीं करता। इस पूर्व विकेटकीपर ने हालांकि कहा है कि उन्हें किसी तरह का पछतावा नहीं है.
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बता दें कि पूरे विश्व कप के दौरान भारतीय टीम से कई खिलाडियों ने कई महत्त्व पूर्ण योगदान दिए, कप्तान कपिल देव ने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ 175 रनों की ऐतिहासिक पारी भी खेली, फाइनल में मोहिंदर अमरनाथ ने गेंद और बल्ले के साथ सहनदार प्रदर्शन किया, इसके अलावा भी कई खिलाडियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया जिससे भारत यह ऐतिहासिक कारनामा करने में कामयाब हुए मगर इस पूरी यात्रा में कपिल देव के बाद जो सबसे महत्वपूर्ण प्रदर्शन रहा वो किरमानी का रहा. आपको मालूम है कि ज़िम्बाब्वे के खिलाफ एक समय भारत की हालत बड़ी दयनीय हो गयी थी. ज़िम्बाब्वे से हारने का मतलब था भारत की विश्व कप से कहानी ख़त्म, तब कप्तान कपिल देव ने 175 रनों की अविस्मरणीय पारी खेली। भारत का स्कोर एक समय पांच विकेट पर 17 रन था, सभी बड़े बल्लेबाज़ पवेलियन लौट चुके थे, रॉजर बिन्नी और मदनलाल के सहयोग से स्कोर 140 तक पहुंचा, जिसमें अधिकाँश रन कपिल के बल्ले से थे. आठ विकेट गिरने के बाद क्रीज़ पर किरमानी आये और फिर एक ऐतिहासिक साझेदारी हुई, कपिल और किरमानी के बीच 126 रनों की साझेदारी हुई और टीम का स्कोर 166 तक पहुंचा। भारत का यह मैच जिताऊ स्कोर इस लिए बन सका कि किरमानी ने एक छोर को पूरी तरह से संभाल लिया, रन उन्होंने भले ही 24 बनाये मगर किरमानी के कारण ही कपिल वह पारी खेल सके. आज कपिल की उस पारी को सभी याद करते हैं लेकिन किरमानी की उतनी चर्चा नहीं होती जितनी होनी चाहिए, यही वजह है कि भारत के लिए बेमिसाल कीपिंग करने वाले किरमानी को इस बात का मलाल है.
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हालाँकि कपिल देव अपने उन साझेदारों के योगदान को कभी नहीं भूलते और अपनी ऐतिहासिक पारी का पूरा श्रेय रॉजर बिन्नी, मदनलाल और किरमानी को देते हैं. कपिल का मांनना है कि इन लोगों ने मदद नहीं की होती तो मैं यह पारी न खेल पाता। किरमानी को मलाल है तो उस मीडिया से जो इस मैच पर चर्चा में कभी इस बात का ज़िक्र नहीं करता कि कपिल देव यह पारी कैसे खेल सके. वह हमेशा इस बात की ही चर्चा करता है कि कपिल देव की इस ऐतिहासिक पारी की बदौलत ही भारत नॉक आउट के लिए क्वालीफाई कर पाया और बाद में चैम्पियन भी बना.

