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UP Political News: अपनी ‘एमवाई’ समीकरण में फंसी सपा, चाचा की अनदेखी भतीजे को पड़ ना जाए भारी

लखनऊ। सपा जिस मुस्लिम-यादव यानी एमवाई समीकरण के भरोसे चुनाव मैदान में उतरती है आज उसी सपा को आजमगढ़ में कड़ी टक्कर मिल रही हैं यहां भाजपा यादव वोटों को अपने पक्ष में करने में लगी है। वहीं बसपा मुस्लिमों में सेंधमारी कर रही है। 
बता दें कि मुलायम सिंह यादव जब आजमगढ़ से 2014 का लोस चुनाव लड़े थे। उन्हें टक्कर देने के लिए भाजपा से रमाकांत यादव जो कि अब सपा विधायक हैं और बसपा से गुडडू जमाली मैदान में थे। चुनाव प्रचार के समय मुलायम को खतरे का अहसास हुआ तो उन्होंने शिवपाल यादव को आजमगढ़ कैंप की कमान सौंप दी थी। उनके पहुंचने से सपा की बिगड़ी स्थिति संभल गई थी। मुलायम भारी वोटों से चुनाव जीते।

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आज अखिलेश के पास ना तो शिवपाल हैं और ना ऐसे स्टार प्रचारक जो कि आजमगढ़ में सपा की स्थिति को मजबूत कर सकें। सपा ने आजमगढ़ उपचुनाव के स्टार प्रचारक की सूची से शिवपाल को बाहर कर दिया है। अगर आजमगढ़ में शिवपाल होते तो उनकी अपील का असर जरूर दिखाई देता। वह अपने लोगों को वोट करने का संकेत कर सकते थे। अब आजमगढ़ में उपचुनाव को लेकर चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। शिवपाल की गैरमौजूदगी का असर सपा को नुकसान के रूप में उठाना पड़ सकता है। 

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ऐसे में सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए आजमगढ़ में दोहरी प्रतिष्ठा दांव पर है। इस बार यह उपचुनाव उनके लिए चुनौती है। मुस्लिम यादव वोट बैंक में सेंधमारी बचाने से चूंके तेा आजमगढ़ जैसे गढ़ सपा के हाथ से निकल जाएगा। बता दें कि आजमगढ़ सपा का मजबूत गढ़ कहा जाता है। आजमगढ़ से सपा काफी लंबे समय से चुनाव में जीत हासिल करती रही है। लेकिन इस बार ये उपचुनाव और इसमें मिल रही चुनौती अलग तरह की है। चुनौती देने को भाजपा से दिनेश लाल निरहुआ मैदान में हैं। आजमगढ़ में यादव वोट भारी तादाद में हैं। जिसके लिए सपा और भाजपा के लिए रात दिन एक कर रहे हैं। पिछली बार 2019 के आम चुनाव में दिनेश लाल ने अखिलेश यादव को कड़ी टक्कर दी थी।

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