BCCI प्रमुख सौरव गांगुली सुप्रीम से क्लीयरेंस मिलने के बाद भी इस पद पर अपना सफर जारी नहीं रख पाएंगे, क्योंकि बोर्ड ने गांगुली की जगह 84 विश्व कप के हीरो रॉजर बिन्नी को उनकी जगह सौंपने का फैसला किया है. गांगुली जो बोर्ड के बहुत चहीते थे, अचानक उनसे मोह भंग हो जाने पर सवाल उठने लगे हैं. सियासत भी शुरू हो चुकी है. कहा जा रहा कि गांगुली के साथ ऐसा व्यवहार इसलिए किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने भाजपा ज्वाइन करने के ऑफर को ठुकरा दिया। बता दें कि पिछले लोकसभा और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के दौरान कहा जा रहा था कि पीएम मोदी और अमित शाह की ओर से उन्हें सक्रीय राजनीति में आने का प्रस्ताव दिया गया था जिसे उन्होंने स्वीकार करने से इंकार कर दिया था.
तृणमूल कांग्रेस के शांतनु सेन के मुताबिक यह भाजपा का राजनीतिक प्रतिशोध है. बता दें कि गांगुली के साथ बतौर सचिव काम करने वाले अमित शाह के पुत्र जय शाह अपने पद पर बरकरार रहेंगे, वहीँ BCCI के नए चीफ के लिए रोजर बिन्नी का नाम फाइनल हुआ है. मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि बोर्ड गांगुली के काम काज से खुश नहीं है, हालाँकि रिपोर्ट में इस बात का कोई ज़िक्र नहीं कि नाराज़गी किस बात को लेकर है. BCCI का चीफ रहते हुए गांगुली ने ऐसा कौन सा फैसला ले लिया जिससे बोर्ड की बदनामी हुई, या टीम का अहित हुआ। जहाँ तक टीम इंडिया के प्रदर्शन की बात है तो ICC टूर्नामेंट और पिछले एशिया कप को छोड़कर लगातार अच्छा प्रदर्शन रहा है.
दरअसल यह फैसला तब और भी अजीब लगता है जब गांगुली समेत पूरे बोर्ड को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से लगातार दूसरा कार्यकाल जारी रखने की इजाजत मिली थी, इसके बावजूद गांगुली को हटाया जा रहा है तो सवाल उठता है कि क्या बोर्ड जय शाह को कंटीन्यू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट गया था? 18 अक्टूबर को BCCI की AGM है और नए बोर्ड चीफ के नाम का एलान भी होना है. रॉजर बिन्नी ने अध्यक्ष पद के लिए अपना नॉमिनेशन फाइल कर दिया है जय शाह ने भी सचिव के लिए नॉमिनेशन किया है, कोषाध्यक्ष पद के लिए मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष आशीष शेलार ने दावेदारी पेश की है. किसी पद पर कोई दूसरा नॉमिनेशन नहीं हुआ है इसलिए इन सभी का निर्विरोध चुना जाना भी तय है.

