- 40 प्रतिशत विद्यार्थी नहीं जमा कर रहे हैं स्कूल फीस
- इन बच्चों के इस साल शिक्षा ग्रहण न करने की आशंका
न्यूज डेस्क। कोरोना संक्रमण के दौर में विद्यार्थियों की स्कूल फीस जमा न होने से परेशान स्कूलों को अब विद्यार्थियों के बीच सत्र में स्कूल छोड़ जाने की चिंता सताने लगी है। कारण यह है कि काफी अभिभावक ऐसे हैं जो आधा सत्र गुजरने के बाद भी न तो बच्चों की फीस जमा कर रहे हैं और न ही अपनी आर्थिक समस्याओं को लेकर स्कूल प्रबंधन से किसी प्रकार का संपर्क कर रहे हैं।
ऐसे में स्कूल संचालकों को आशंका है कि यह बच्चे इस साल अपने शिक्षा को बीच सत्र में ही छोड़ देंगे। एक अनुमान के मुताबिक ऐसे बच्चे लगभग 40 प्रतिशत होंगे जिनमें छोटी कक्षाओं के बच्चों की संख्या अधिक होगी।
भारत में कोरोना संक्रमण की शुरुआत होने के साथ ही सरकार ने स्कूलों को बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे। तब से ऑनलाइन क्लासों के माध्यम से बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है। मगर अधिकतर स्कूल आज भी अभिभावकों से फीस जमा नहीं करा पा रहे हैं।
बात करें मेरठ शहर की तो यहां पर लगभग 15 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं जिन्हें फीस जमा करवाने में कोई दिक्कत नहीं हुई है। इन स्कूलों में शहर के धनाढ्य वर्ग के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इन स्कूलों में जहां अभिभावकों द्वारा समय से फीस जमा की जा रही है वहीं स्कूलों ने भी अपने स्टाफ को पूरी तनख्वाह दी है।
इन स्कूलों की ऑनलाइन पढ़ाई भी काफी अच्छी चल रही है। मगर 85 प्रतिशत स्कूल आज भी आर्थिक संकटों से जूझ रहे हैं। क्योंकि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की फीस पूरी जमा नहीं हो पा रही है।
आधा सत्र गुजरने के बावजूद किसी बच्चे ने 2 महीने तो किसी ने 4 महीने की फीस जमा कर रखी है। इन बच्चों को भी ऑनलाइन क्लास में शामिल करना स्कूल की मजबूरी है।
मगर स्कूलों की चिंता उन बच्चों को लेकर है जो रिकाॅर्ड के अनुसार अभी भी स्कूल के ही छात्र हैं मगर वह फीस जमा नहीं कर रहे हैं। ऐसे भी बच्चे हैं जो ऑनलाइन क्लास तक अटेंड नहीं कर रहे हैं। वही उनके अभिभावक भी फीस जमा करने के संबंध में स्कूल प्रबंधन से किसी प्रकार का संपर्क नहीं कर रहे हैं।
ऐसे बच्चों को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। स्कूल प्रबंधन को आशंका है कि इन बच्चों में से अधिकतर विद्यार्थी इस शैक्षिक सत्र में पढ़ाई जारी नहीं रखेंगे। ऐसे में स्कूल इन बच्चों से फीस भी नहीं वसूल पाएंगे और उन्हें काफी आर्थिक नुकसान उठाना होगा।
गौरतलब है कि सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार 21 सितंबर से कक्षा 9 से 12 तक के छात्र ही स्कूल जा सकेंगे, वह भी सिर्फ अपने सवालों का जवाब पाने या जरूरी काम के लिए। मगर शुरुआती कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए अभी तक सरकार ने कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है।
स्कूलों को चिंता है कि शुरुआती कक्षाओं के विद्यार्थी यदि इस वर्ष स्कूल ड्राॅप कर देते हैं तो उन्हें बड़ा आर्थिक संकट झेलना पड़ेगा। एक अनुमान के अनुसार ऐसे बच्चों की संख्या लगभग 40 प्रतिशत तक रहेगी जिनमें शुरुआती कक्षाओं के बच्चों का प्रतिशत अधिक रहेगा।
नाम न छापने की शर्त पर एक स्कूल संचालक ने बताया कि एक ओर जहां अभिभावक फीस जमा नहीं कर रहे हैं वही सरकार की ओर से फीस जमा न करने वाले बच्चों को भी ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने के आदेश हैं।
इन बच्चों को न तो क्लास से निकाला जा सकता है और न ही अभिभावकों पर फीस जमा करने का दबाव बनाया जा सकता है । ऐसे में सक्षम अभिभावक भी मौके का फायदा उठाते हुए फीस जमा करने में आनाकानी कर रहे हैं। आर्थिक संकटो से जुझ रहे प्रबंधन को स्कूल को चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों को भी पूरी तनख्वाह नहीं दी जा रही है।

