साहेब,आपने ये क्या किया….

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साहेब,आपने ये क्या किया….

सुनील शर्मा

लोजी लो करलो बात अरे साहेब, हम तो सालों से साहेब-साहेब का ही जाप करते आ रहे थे, सुबह हो या शाम बिना साहेब के नाम का गुणगान किये मन को चैन ही न पड़ा। साहेब, लोगों ने हमें आपका अंधभक्त कहा, हमें फिर भी बुरा नहीं लगा बल्कि उनको गरियाने में कोई कसर भी न छोड़ी। लेकिन साहेब अब लोगों की बातों का कोई जबाव न बचा हमारे पास। और बुरा न मानना साहेब, अब तो हमारी भक्ति भी डांवाडोल होेने लगी है। साहेब, विश्वास डगमगा गया है, भरोसा टूट गया है, आपकी बातों से आपको वादों से।

अब साहेब, हमने तो हमेशा आपका कहा ही किया। आपने कहा, ताली-थाली बजाओ, हमने बजाई। आपने कहा, कोरोना वारियर्स का सम्मान करो, हमने किया। आपने कहा, मास्क पहनो, साहेब घर में जितने जोड़ी कपड़े नहीं हैं पहनने को उससे ज्यादा मास्क खरीद लाये। आपने कहा, दूरी बनाकर रखो, साहेब साल भर से किसी शादी में भी नहीं गये हम तो। पड़़ोसी को देखकर भी ऐसे दूरी बनाकर निकलते हैं जैसे उससे उधार लिया हो। साहेब, आप कहते रहे चिंता न करो, मैं हूं न। हम भी कहते रहे लोगों चिंता न करो, साहेब हैं न। अब दिख रहा है कि हमारे ऊपर बस साहेब ही हैं, बाकी कुछ नहीं। न दवाएं हैं न अस्पताल, न डाॅक्टर्स हैं न ऑक्सीजन, हैं तो बस साहेेब, साहेब और सिर्फ साहेब।

साहेब विपक्षियों के सवाल के जवाब तो आप देते नहीं हैं मगर अपनों के सवालों के जवाब तो आपको देने की चाहियें। तो साहेब जब दिसंबर में ही लग रहा था कि कोरोेना की दूसरी लहर खतरनाक होेगी तो आखिर तैयारियां क्या कीं आपने। बच्चे-बच्चे को पता था कि जरूरत पड़ेगी ऑक्सीजन की, कमी होगी अस्पतालों में बेड की, बाजारों में नहीं मिलेंगी दवाईयां, रेमडेसिवियर जैसा इंजेक्शन भारी ब्लैक में बिकेगा। मगर साहेब आप तो दूरदर्शी हैं, आप क्यों नहीं समझ पाये इन जरूरतों को, क्यों नहीं की आपने कोई तैयारी। और साहेब जब घर की जरूरते पूरी नहीं हुई थीं तो दानवीर कर्ण बनकर दवाएं आदि दान करने की जरूरत क्या थी। अब आपको तो मिल जायेगा वल्र्ड लेवल का कोई अवार्ड लेकिन जिनकी तस्वीरें दीवारों पर टंग गयीं उनके बलिदान को कौन याद करेगा। साहेब जिंदगी और मौत तो ऊपरवाले के हाथ में है लेकिन इलाज पाना तो हर देशवासी का संवैधानिक हक है जो आप उसे दिलाने में नाकाम रहे। और नाकामी तो देखा जाये आप हर कदम पर कहते रहे कि हमारे पास सब है, दवाएं हैं, डाक्टर्स हैं, अस्पताल है। मगर जब इनकी जरूरत पड़ी तो इन सबके साथ आप भी गायब दिखे। न इलाज मिला न सरकार और जब बात हाथ से निकल गयी तो आप महामारी बढ़ने के लिये हमे ही जिम्मेदार ठहरा कर लाॅकडाउन की धमकी देते दिखाई दिये।

अरे साहेब, यह कमी कोरोना की पहली लहर में हुई तो समझ आया कि हम तैयार नहीं थे। मगर एक साल के अनुुभव के बाद भी आप अनुभवहीन कैसे रह गये। ठीक है आप सबको रामलला के दर्शन कराने के लिये मंदिर बनवा रहे हैं मगर साहेब, हम रामलला की मूर्ति के दर्शन कर ही खुद को सौभाग्यशाली समझ लेंगे, आप हमें साक्षात रामजी का दर्शन कराने पर क्यों तुले हैं। आखिर चंद राज्योें में चुनाव चंद महीने टल ही जाता या पंचायत चुनाव फिलहाल रोक दिये जाते तो कौन सा देश का विकास थम जाता। हां हो सकता था कि अभी आपके पक्ष में बना माहौल शायद फिर कभी न बन पाता और आप जीत हासिल करने में नाकाम रह सकते थे। मगर साहेब ऐसा करने की यदि आप हिम्मत दिखा देते तो न जाने कितनी जिंदगियों को बचा लेते और उनकी दुआएं आपके काम जरूर आतीं। अब आपको जीत मिलेगी या नहीं यह तो आनेे वाला वक्त ही बतायेगा लेकिन आपने बद्दुआएं जरूर हासिल कर ली हैं।
साहेब, बात बुरी लग सकती है और लगनी भी चाहिये। लेकिन ध्यान रहे साहेब, हम विपक्ष नहीं हैं जो हर दम आप पर सवाल उठाते रहते हैं। हम वो हैं जिन्होंने जब से होश संभाला है हाथ में कमल का फूल ही पाया है। इसके अलावा न कुछ देखा, न कुछ सोचा, न कुछ समझा। न खाता न बही, साहेब जो कह दें वही सही मान कर विरोधियों को पस्त करते गये।

लेकिन साहेब अब अस्पतालों में इलाज के लिये भटकते लोगो का रूदन सहन नहीं होता। अस्पतालों के बीच चक्कर काटते हुए दम तोड़ते लोग देखे नहीं जा रहे। ऑक्सीजन के अभाव में तड़प कर मरते लोग मेरे अन्र्तमन को छलनी किये दे रहे हैं। साहेब, मरते हुए लोगों के परिजनों का रूदन मेरे कानों में सीसा बनकर उतर रहा है। रोते-बिलखते लोेगों को देखकर मेरी आंखे पथरा गयी हैं। अब न उनको आश्वासन देने के लिये मेरे पास शब्द बचे हैं न हौसला। साहेब, आप तो सबके मन की बात जानते हो, अन्र्तयामी हो, तो एक बार बता दीजिये कि क्या कहूं अपनों को खो चुुके लोगों को, अस्पतालों की सीढियों पर अपना ऑक्सीजन सिलेंडर जो न जाने कब खत्म हो जाये लेकर बैठे लोगों को क्या आश्वासन दूं। साहेब, कैसे कहूं कि मैं आपकी पार्टी का आदमी हूं, कैसे कहूं कि मैं आपका भक्त हूं। नहीं साहेब, मैं पहले देशभक्त था, हूं और हमेशा रहूंगा। आप सही हैं या गलत इसका इंसाफ एक दिन जनता जरूर करेगी मगर आज मेरी देशभक्ति आज आपकी अंधभक्ति को तिलांजलि देती है…

  • आपका और आपकी पार्टी का एक अंधभक्त

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