लखनऊ। सपा मुखिया अखिलेश यादव (SP chief Akhilesh Yadav) सांसद बने रहने के लिए विधायक की छोड़ेंगे। समाजवादी पार्टी से मिली सूत्रों के अनुसार करीब एक दशक बाद फिर से शिवपाल यादव नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में नजर आ सकते हैं। शिवपाल यादव इससे पहले मायावती सरकार के दौरान नेता प्रतिपक्ष हुआ करते थे। लेकिन साल 2017 में अखिलेश से विवाद के बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी बना ली थी और सपा से अलग हो गए थे। विधानसभा चुनाव 2022 में शिवपाल यादव प्रसपा से नालड़कर रख सपा के बैनर तले चुनाव लड़े थे।
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दर्शन समाजवादी पार्टी स्वस्फिट शिप चुनाव हार गई है। इसके अलावा कुछ आम सभा में उनके नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी भी चुनाव हार चुके हैं। अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा चल रही थी कि अखिलेश यादव सांसदी छोड़कर नेता प्रतिपक्ष बन सकते हैं और सदन से लेकर सड़क तक सरकार को भी रखते हैं। लेकिन सूत्रों का कहना है कि ऐसा नहीं होने वाला। अपने चाचा शिवपाल यादव से कैसे संबंध सही करने और संगठन में मजबूती से काम करने के लिए उनको नेता प्रतिपक्ष के पद दिया जा सकता है।
संगठन में अच्छी पकड़ के लिए जाने जाते हैं शिवपाल
शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) संगठन में पकड़ के लिए जाने जाते हैं। मुलायम सिंह यादव के दौरान उत्तर प्रदेश में संगठन का ज्यादातर काम शिवपाल यादव के पास रहा करता था। इसमें अलग-अलग फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन के पदाधिकारियों का चयन हो या के जिला अध्यक्षों का चयन। सभी मामलों में शिवपाल यादव का हस्तक्षेप हुआ करता था। लेकिन साल 2012 के बाद जैसे-जैसे अखिलेश पार्टी में मजबूत होते गए शिवपाल की स्थिति खराब होती गई। अब एक बार फिर से चाचा और भतीजा बच साथ आकर भारतीय जनता पार्टी को सदन से लेकर सड़क तक देना चाहते हैं। हालांकि शिवपाल को नेता प्रतिपक्ष बनाने का भी कोई ऑफिसियल घोषणा नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि 21 तारीख को अखिलेश य यादव ने अपने जीते हुए सारे विधायकों के साथ अपने सहयोगी दलों के साथ भी बैठक करने का प्लान किया है। उस समय तक से शिवपाल को नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला हो सकता है।

