26 सितम्बर 2022 सोमवार से शारदीय नवरात्रि की शुरूआत हो रही है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक शारदीय नवरात्रि मनाए जाते हैं। यदि कोई पूरे नवरात्रि उपवास-व्रत न कर सकता हो तो सप्तमी, अष्टमी और नवमी इन तीन दिन उपवास करके देवी की पूजा करने से वह संपूर्ण नवरात्रि के उपवास के फल को प्राप्त करता है। श्रीमद् देवी भागवत में कहा गया है कि यह व्रत महासिद्धि देने वाला, धन-धान्य प्रदान करने वाला, सुख और संतान बढ़ाने वाला, आयु एवं आरोग्यवर्धक तथा मोक्ष तक देने में समर्थ है। नवरात्रि व्रत शत्रुओं का दमन व बल की वृद्धि करने वाला माना जाता है। महान-से-महान पापी यदि नवरात्रि व्रत कर ले तो संपूर्ण पापों से उसका उद्धार हो जाता है। नवरात्रि का उत्तम जागरण वह है कि जिसमें शास्त्र ज्ञान की चर्चा हो। प्रज्जवलित दीपक रखा हुआ हो।
देवी का भक्तियुक्त कीर्तन हो, वाट्य, ताल सहित सात्त्विक संगीत हो, मन प्रसन्न हो, सात्त्विक नृत्य हो, तड़क भड़क वाले या ऐसे दूसरे किसी नृत्य का आयोजन न हो, सात्त्विक नृत्य, कीर्तन के समय जगदम्बा माता के सामने दृष्टि स्थिर रखें। किसी को बुरी नजर से न देखें।
नवरात्रि में गरबे गाने की प्रथा है। पैर के तलुओ एवं हाथ की हथेलियों में शरीर की सभी नाड़ियों के केन्द्रबिन्दु हैं। जिन पर गरबे में दबाव पड़ने से एक्यूप्रेशर का लाभ मिल जाता है एवं शरीर में नयी शक्ति-स्फूर्ति जागृत हो जाती है। नृत्य से प्राण-अपान की गति सम होती है तो सुषुप्त शक्तियों को जागृत होने का अवसर मिलता है। गाने से हृदय में माँ के प्रति दिव्य भाव उमड़ता है। बहुत गाने से शक्ति क्षीण होती है।

