बनारस में बसेरा: मेरा नमक खाने से आपका नमक खाने तक

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बनारस में बसेरा: मेरा नमक खाने से आपका नमक खाने तक

अमित बिश्‍नोई

बात यूपी विधानसभा चुनाव के सातवें चरण (Seventh phase of UP assembly elections) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी निवास की है, चुनाव में भाजपा की हारजीत से ज़्यादा इस समय चर्चा इस बात की है कि देश, प्रदेश और विदेश के मौजूदा हालात को देखते हुए मोदी जी को इस समय कहाँ होना चाहिए था? दिल्ली में या बनारस में? मोदी जी के बनारस में बसेरे की लोग बाग अपने अपने ढंग से व्याख्या कर रहे हैं। कुछ आलोचनाजीवी हमेशा की तरह मोदी जी बखिया उधेड़ने में लगे हैं तो वहीँ भक्तजीवी इस अस्थायी बसेरे में कुछ भी गलत नहीं देख रहे हैं. वैसे सही भी है, मोदी जी देश के प्रधानमंत्री हैं दिल्ली में रहें या बनारस में, क्या फ़र्क़ पड़ता है।

यह कोई पहला मौका नहीं है जब मोदी जी ने चुनाव के दौरान बनारस में बसेरा किया हो. चुनाव जीतने के लिए चुनाव के दिनों में नेता का अपने क्षेत्र में निवास करना परम कर्तव्य होता है. कम से वोटर को नेता जी की शक्ल देखकर यह तो याद आता है कि यही है वह जिसके पास हमने पांच साल के लिए अपनी किस्मत गिरवी रखी थी. हालाँकि मोदी जी के मामले में ऐसा नहीं है वह अपने कार्यक्षेत्र काशी में आते रहते हैं हालाँकि चुनावी बेला में आना जाना कुछ ज़्यादा हो जाता है वैसे अब तो लोग मोदी जी की काशी बोलने लगे हैं, पता नहीं भगवान को यह बुरा लगता है या नहीं। खैर यह मोदी जी का और भगवान् का आपस का मामला है, माँ गंगा ने उन्हें काशी बुलाया था और उनकी आज्ञा पर ही वह यहाँ आये थे।

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विषय भटक रहा है, बात हम कर रहे थे चुनाव में मोदी जी (Mr. Modi) के बनारस में बसेरे की। वैसे तो राजनीति के गलियारों में तरह तरह बातें हो रही हैं लेकिन यह बातें ऐसी बातें हैं जो लोगों ने फैलाई हैं. अब इन बातें फैलाने वालों की माने तो मोदी जी अपने गढ़ को बचाने के लिए वाराणसी में डेरा डाले हुए हैं. अब जितने मुंह उतनी बातें, कोई कहा रहा है कि योगी जी का गोरखपुर दरक रहा है और मोदी जी यह बिलकुल नहीं चाहते कि उनका भी किला दरके, इसलिए समय रहते उन्होंने यह क़दम उठाया है. दूसरी बात अगर योगी जी ने गोरखपुर को बचा लिया और मोदी जी इस मामले में (अपने गढ़ में सीटें जीतने के मामले में) पीछे रह गए तो 2024 पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए मोदी जी की कोशिश है कि सरकार बने या न बने सीटें योगी जी से ज़्यादा ही आना चाहिए वरना लोग कहेंगे गुरु गुड़ ही रह गया चेला शक्कर बन गया।

बात को थोड़ा गंभीर करते हैं. 6 चरण का चुनाव संपन्न हो चूका। दोनों ही पार्टियों को अबतक बहुमत मिल चूका है, सातवां चरण यह लोग अपनी लीड बढ़ाने के लिए लड़ रहे हैं, शायद इसलिए अखिलेश 82 साल के मुलायम के साथ कठोर व्यवहार कर रहे हैं और उन्हें चुनावी मंच पर खड़ा कर उनसे साइकिल के लिए अपील करवा रहे हैं और शायद इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी जी यूक्रेन में फंसे नागरिकों की पुकार को अनदेखा कर अपना किला बचाने के लिए स्वयं ही मोर्चा संभालने काशी में डेरा जमाये हुए हैं।

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हालाँकि यूक्रेन मामले में उनका पीआर ज़ोरदार चल रहा है, बच्चे अपने वीडियोज़ में कुछ भी पीड़ा बयान कर रहे हों पर सरकार की तरफ सब आल इज़ वेल है. यूक्रेन से अपने दम पर evacuate हुए बच्चों का सीमा पार से सरकारी evacuation जारी है. बच्चे भी नहीं समझ पा रहे हैं कि यह कैसा evacuation है. फ्लाइट से मुफ्त की सवारी करा देना evacuation की नई परिभाषा है. फ्लाइट में इन बच्चों से चिड़िया उड़, तोता उड़ , मैना उड़, हाथी उड़ वाला खेल खेला जा रहा है. भारत माता की जय के बीच मोदी जी ज़िंदाबाद का नारा घुसेड़ दिया जा रहा है, लेकिन बच्चे भी बड़े सयाने निकले, शायद उन्हें मालूम था कि भारत माता के बाद क्या बोलने वाले हैं. भारत माता की जय पर तो बच्चों ने ज़ोरदार नारा लगाया मगर जैसे ही मोदी जी का नाम पुकारा बच्चे चुप हो गए. एक तरह से इसे आप इंटरनेशनल अपमान कह सकते हैं लेकिन इसमें मोदी जी की कोई भूमिका नहीं, यह सब चापलूसों की करतूत है. करते यह हैं बदनाम मोदी जी होते हैं।

लगता हैं मैं फिर विषय से भटक गया? यूपी चुनाव और यूक्रेन को आपस में मिला दिया। यह शायद इसलिए हो रहा है कि मैं भी मोदी जी से प्रभावित लग रहा हूँ. यूपी चुनाव का रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) से कनेक्शन तो उन्होंने ही मिलाया था, यह अलग बात है कि कनेक्शन ठीक से अब तक कनेक्ट नहीं हो पाया और सातवें चरण का चुनाव प्रचार भी लगभग ख़त्म हो गया है।

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अपनी बात समाप्त करने से पहले मैं बस एक ही बात कहूंगा कि किसे हार मिलती और किसे जीत, इसका फैसला तो 10 मार्च को हो ही जायेगा मगर मोदी जी (Mr. Modi) का काशी में इस बार का बसेरा पहले वाला तो नहीं है वरना कल तक मेरा नमक खाने की बात कहने वाले मोदी जी मैंने आपका नमक खाया है पर न आते।

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