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Verdict on Demonetisation: नोटबंदी के खिलाफ सभी याचिकाएं ख़ारिज, SC ने कहा फैसला वैधानिक

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8 नवंबर 2016 को रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश के नाम सम्बोधन कोई भी नहीं भूल सकता। इस सम्बोधन के बाद पूरे देश में आर्थिक, सामाजिक और आर्थिक भूचाल आ गया था. प्रधानमंत्री ने एक झटके में 1,000 रुपये और 500 रुपये के करेंसी नोटों को सिस्टम से बाहर करने का एलान कर दिया था. बैंको के बाहर लम्बी लम्बी कतारें लग गयी थीं, नोटों को बदलने के लिए लोग 24 घंटे में लाइन में लगे रहते थे, इस दौरान लाइन में लगे लगे सौ से ज़्यादा लोगों की मौत भी हो गयी, गर्भवती महिलाओं की ज़चगी भी हो गयी. पूरे देश में कई महीनों तक अफरातफरी का आलम रहा. नोटबंदी का मुद्दा आज भी एक राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को दर्जनों लोगों ने चैलेन्ज किया। आज उन सभी याचिकाओं को ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने सरकार के फैसले को वैधानिक करार दिया है.

जस्टिस बी वी नागरत्ना ने जताई असहमति

हालाँकि पांच जजों की बेंच का फैसला आम सहमति से नहीं हुआ है, जस्टिस एस ए नज़ीर की अध्यक्षता वाली बेंच की जस्टिस बी वी नागरत्ना ने फैसले पर अपनी असहमति जताई है. जस्टिस बी वी नागरत्ना ने केंद्र सरकार के फैसले को गैर कानूनी बताते हुए कहा कि नोटबंदी का फैसला अधिसूचना के जरिए ना होकर विधेयक के जरिए होना चाहिए था. उन्होंने कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण फैसलों को पहले संसद में रखा जाना चाहिए था. जस्टिस नागरत्ना ने अपने फैसले में कहा कि साफ़ लग रहा है कि नोटबंदी का फैसला RBI की इच्छा से नहीं सरकार की मर्ज़ी से हुआ है.

फैसले को यूँ ही नहीं पलट सकते

वहीँ बाक़ी चार जजों ने एकमत से फैसला देते हुए कहा कि इस फैसले को सिर्फ इसलिए उलटा नहीं जा सकता कि ये सरकार का फैसला था. उन्हें नोटबंदी के फैसले में कोई त्रुटि नज़र नहीं आती. बेंच ने कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया सिर्फ इसलिए त्रुटिपूर्ण नहीं हो सकती है क्योंकि यह केंद्र सरकार से निकली है. कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड देखने से ऐसा मालूम होता है कि इस फैसले से पहले 6 महीने की अंतिम अवधि के भीतर RBI से परामर्श हुआ था.

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